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देर रात चार-पाँच लड़कियों का झुंड बदहवास , घबराया हुआ जब पुलिस स्टेशन में दाखिल हुआ तो पुलिस वालों के भी होश उड़ गए । पहले उन्हें बैठाया गया । ढाँढस बँधाया । फिर थानेदार साहब ने कहा-"हाँ , अब बताइए क्या हुआ ?"
" कुछ लड़कों ने हमारी कार का पीछा किया , हमें किडनैप करने की कोशिश की । बड़ी मुश्किल से जान बचाकर यहाँ तक आईं हैं ।" उनमें से एक लड़की ने आपबीती सुनाई ।
" देर रात आप घर से बाहर क्यों निकली ?" थानेदार साहब ने आखिर अपनी औकात बता ही दी ।
" यदि आप लड़कों को देर रात घर से बाहर न निकलने दें तो लड़कियाँ अपने आप सुरक्षित हो जाएगी । लड़कों को समझाइए ।" थानेदार साहब सकपका गए ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on August 14, 2017 at 8:19am
बहुत-बहुत आभार आदरणीय सी.एम. उपाध्याय जी । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 14, 2017 at 12:24am

नर-नारी समानता के अधिकार और हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर एक अच्छी लघुकथा पढ़ने को मिली | आपको हार्दिक बधाई |  

Comment by Nita Kasar on August 11, 2017 at 9:44pm
सारे नियम क़ानून लड़कियों के लिये ही क्यों लड़कों के लिये भी ये नियम लागू होना चाहिये ।बधाई आपको आद० मोहम्मद आरिफ़ जी ।
Comment by Mohammed Arif on August 9, 2017 at 8:00pm
आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब , दर असल मैं आपकी ही टिप्पणी का इंतज़ार कर रहा था । आपकी उत्साहजनक और सुधारवादी टिप्पणी पाकर संबल मिला । आगामी लेखन में ध्यान रखूँगा । बहुत-बहुत शुक्रिया और आभार ।
Comment by Samar kabeer on August 9, 2017 at 6:53pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,12 पंक्तियों की लघुकथा बहुत उम्दा हुई है,कथानक भी अच्छा है,लेकिन अंत कुछ और मज़बूत होना था । बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on August 9, 2017 at 8:26am
बहुत-बहुत आभार आदरणीया वसुधा गाडगिल जी । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by Mohammed Arif on August 9, 2017 at 8:25am
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,आपकी उन्मुक्त , सटीक और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूल । बहुत-बहुत दिली आभार ।
Comment by VASUDHA GADGIL on August 9, 2017 at 8:05am
उम्दा कटाक्ष
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 8, 2017 at 9:28pm
समानता के अधिकार/सुरक्षा व्यवस्था/ नियमों-कानूनों पर कटाक्षपूर्ण विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहब।
Comment by Mohammed Arif on August 8, 2017 at 9:14pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीया कल्पना भट्ट जी । आपकी त्वरित टिप्पणी ने लेखन सार्थक बना दिया ।

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