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ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना

२२१ १२२१ १२२१ १२२ 

 

पिस्तौल-तमंचे से ज़बर ईद मुबारक़ 

इन्सान पे रहमत का असर, ईद मुबारक़
 
पास आए मेरे और जो ’आदाब’ सुना मैं
मेरे लिए अब आठों पहर ईद मुबारक़
 
हर वक़्त निग़ाहें टिकी रहती हैं उसी दर
पर्दे में उधर चाँद, इधर ईद मुबारक़ !
 
जिस दौर में इन्सान को इन्सान डराये
उस दौर में बनती है ख़बर, ’ईद मुबारक़’ !
 
इन्सान की इज़्ज़त भी न इन्सान करे तो
फिर कैसे कहे कोई अधर ईद मुबारक़ ?
 
जब धान उगा कर मिले सल्फ़ास की पुड़िया
समझो अभी रमज़ान है, पर ईद मुबारक़ !
 
भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
कह उठती है रह-रह के कमर.. ईद मुबारक़ !
 
तू ढीठ है बहका हुआ, मालूम है, लेकिन
सुन प्यार से.. बकवास न कर.. ’ईद मुबारक़’ ! 

  

जो बीत गयी रात थी, ’सौरभ’ उठो फिर से
कहती है ये ख़ुशियों की सहर, ईद मुबारक
*****************
-सौरभ

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 28, 2017 at 8:11pm

पिस्तौल-तमंचे से ज़बर ईद मुबारक़ 

इन्सान पे रहमत का असर, ईद मुबारक़ 
 

जिस दौर में इन्सान को इन्सान डराये 
उस दौर में बनती है ख़बर, ’ईद मुबारक़’ ! 
 
इन्सान की इज़्ज़त भी न इन्सान करे तो 
फिर कैसे कहे कोई अधर ईद मुबारक़ ? बहुत खूब

बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय सौरभ सर | हार्दिक बधाई आदरणीय |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 2, 2017 at 4:10pm

आदरणीय विजय निकोर साहब, आपसे मिला अनुमोदन मेरे दायित्वबोध को बहुगुणित करता है. हालाँकि, आजकल व्यस्तता अधिक है और पटल तथा रचनाकर्म पर आवश्यक समय नहीं दे पा रहा हूँ, लेकिन चाहे जिस कारण हो, जैसे-तैसे जो कुछ हो जाता है आप सभी के साथ साझा करने का प्रयास करता हूँ. 

आपका सहयोग बना रहे आदरणीय 

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 2, 2017 at 4:06pm

आदरणीय सुशील सरनाजी, आपकी मुहब्बतों से आप्लावित रहता हूँ. आपकी हौसला अफ़ज़ाई से प्रयास की गति बनी रहती है.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 2, 2017 at 4:05pm

आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, ईद की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 2, 2017 at 4:04pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्माजी, उत्साहवर्द्धन हेतु आपका सादर धन्यवाद 

Comment by vijay nikore on July 2, 2017 at 8:23am

सारे शेर अच्छे लगे, पर निम्न तो बहुत ही खूब !

//इन्सान की इज़्ज़त भी न इन्सान करे तो 
फिर कैसे कहे कोई अधर ईद मुबारक़ ?//

इस खूबसूरत गज़ल के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय सौरभ जी।

Comment by Sushil Sarna on June 28, 2017 at 1:52pm

पिस्तौल-तमंचे से ज़बर ईद मुबारक़
इन्सान पे रहमत का असर, ईद मुबारक़

पास आए मेरे और जो ’आदाब’ सुना मैं
मेरे लिए अब आठों पहर ईद मुबारक़

वाह आदरणीय सौरभ सर वाह। .... ईद मुबारक मौके पर खूबसूरत ग़ज़ल .... ईद की सिवाईयों सी मीठी इस ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें सर।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 28, 2017 at 12:49pm
मुहतरम जनाब सौरभ साहिब,ईद पर अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by Shyam Narain Verma on June 27, 2017 at 5:29pm
बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 27, 2017 at 3:31pm

आदरणीय गिरिराज भाई, आपकी टिप्पणी अपने आप में विशिष्ट आनुमोदन है. आपका सादर धन्यवाद 

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