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कालू की बेटी (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी

आज फिर यहां लोगों का जमावड़ा था। हर तबके की हर आयु वर्ग की लड़कियों, महिलाओं या पुरुषों​का आना-जाना कुछ दिनों से चल रहा था। कोई आभार व्यक्त करने, तो कोई मदद पाने के इरादे से सम्पर्क साधने की कोशिश में था। दरअसल दो सालों के बाद कालू की बेटी विदेश से आई हुई थी। कोई कालू को घेरे हुए था, तो कोई उसकी बेटी को। कालू को सेवा-मुक्त हुए लम्बा समय हो चुका था। बड़े नेताजी के बगीचे के माली बनने से लेकर उनका खास ड्राइवर बनने और फिर उनके खेतों का रखवाला बनने तक के तजुर्बे और फिर रिटायर होने पर लोगों से घिरे रहने के अनुभव से सुखी कालू आज भी लोगों को बहुत ख़ुश नज़र आ रहा था। पत्नी गुज़र चुकीं थीं। बेटे धनवान हो कर अपनी-अपनी जगह स्थापित हो चुके थे।

कालू अतीत में खोया हुआ था, तभी एक खास पड़ोसी ने उसकी तंद्रा भंग की :

"भगवान ने बड़ी कृपा की है तुम पर!" पड़ोसी ने कहा।

"कौन से भगवान? ऊपर वाले या नीचे वाले.. मेरा मतलब 'हमारे नेताजी'?" बड़े से कक्ष में आधुनिक सोफे पर लेटते हुए कालू बोला।

"तुम्हारे लिए तो नेता जी ही भगवान हुए! बेटे तुम्हारे साथ नहीं हैं, तो क्या हुआ। नेताजी की बदौलत तरक़्क़ी पायी हुई तुम्हारी बेटी तो आज भी तुम्हारा पूरा ख़्याल रखती है न!"

"कौन सी बेटी? जो आई है या जो हम लोगों के पास हमेशा रहती है?" कालू ने ठहाका लगाते हुए पड़ोसी के कंधे पर हाथ मारकर कहा।

"तुम लोगों के पास? कौन सी बेटी?"

"अरे भाई! सम्पत्ति है हमारी असली बेटी! धन-दौलत, नेताजी की बदौलत!" महिलाओं से घिरी हुई अपनी बेटी की ओर देखते हुए कालू ने कहा- "यही असली बेटी तो सबके वारे-न्यारे कर रही है, मायका हो या ससुराल!"

"तुम्हारा हो, या बेटी का हो या तुम लोगों के ज़रिए नेता जी का!" पड़ोसी ने कालू के कंधे पर हाथ मारकर कहा।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani yesterday
रचना पटल पर समय देकर प्रोत्साहित करने के लिए सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय सुशील सरना जी।
Comment by Sushil Sarna on Friday

आदरणीय   Sheikh Shahzad Usman  जी सुंदर,सार्थक और संदेशप्रद लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई सर। 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on Friday
मेरी इस रचना पर समय देकर अनुमोदन व हौसला अफ़ज़ाई के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय Mohammed Arif जी व आदरणीय राजेश कुमारी जी।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 18, 2017 at 9:12pm

अच्छी लघु कथा है आद० शेख शहज़ाद उस्मानी जी बहुत बहुत बधाई 

Comment by Mohammed Arif on June 14, 2017 at 10:24pm
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,कथ्य व शिल्प में बेहतर लघुकथा । संवाद भी बढ़िया । बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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