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22 22 22 22 2
ढ़ेरों रंगों के गोल टमाटर
होते हैं कितने लोल टमाटर!1

पककर वे लाल हुए जाते हैं
गिरते,कहते ले तोल, टमाटर।2

अपने अंदर हैं लौह-विटामिन
कहते,खा दिल खोल टमाटर।3

वे खूब चहकते हैं डालों पर
झूलते हैं झूला डोल टमाटर।4

झोंके लगते हैं जोर हवा के
गिरते हैं ढ़म -ढ़म ढ़ोल टमाटर।5
'मौलिक व अप्रकाशित'

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Comment by गिरिराज भंडारी on May 1, 2017 at 9:47am

आदरणीय मनन भाई . इस बाल गज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ । वैसे इसे बाल साहित्य वाले हिस्से मे पोस्ट करना और अच्छा होता ।

Comment by MANINDER SINGH on April 27, 2017 at 1:03pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल सर......बॉल मन को लुभाने वाली....बधाई आपको 

Comment by Mohammed Arif on April 26, 2017 at 10:21pm
आदरणीय मनन कुमार जी आदाब, बहुत अच्छी बाल सुलभता वाली बाल ग़ज़ल । आजकल बाल साहित्य की रचना के प्रति साहित्यकारों में उदासीनता है । आपने अपना छोटा-सा प्रशंसनीय योगदान दिया है ।बहुत-बहुत बधाई ।

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