For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हम मजा लूटते कितने सुख चैन से
कुछ तो सोचो, मजा पे क्या अधिकार है ?
जो शहादत दिए हैं हमारे लिए
याद उनको करो, ना तो धिक्कार है

अपना कर्तव्य क्या है धरा के लिए
फ़र्ज़ कितना चुकाया है हमने यहाँ
मैं कहानी सुनाता हूँ उस वीर की
खो गया आज है जो न जाने कहाँ

वीरता हरदम ही दुनिया में पूजी जाती है
बन के ज्वाला दुष्टों के हौसले जलाती है

ऐसे ही वीरता की गाथा आज गाता हूँ
वीर अब्दुल हमीद की कथा सुनाता हूँ

जिला ग़ाज़ीपुर में है धामूपुर ग्राम, सुनो
जन्मा था नाहर, था हमीद जिसका नाम, सुनो

ईसवी उन्नीस सौ तैंतीस पहली जुलाई थी
शुभ घड़ी ये उस्मान फ़ारूक़ के घर आई थी
 

मैंने माना तुमने माना सारी दुनिया मानी
हिन्द देश का रहने वाला था कोई तूफानी
जो था सच्चा हिंदुस्तानी, जो था सच्चा हिंदुस्तानी

दादी कहती, "बेटा, घर के काम काज कुछ सिखले"
कहता बालक," फउज में जाईब, दादी बात तू बुझ ले"
बचपन से ही हिन्द देश से जुड़ गया था रूहानी

हिन्द देश का रहने वाला था कोई तूफानी
जो था सच्चा हिंदुस्तानी, जो था सच्चा हिंदुस्तानी
 

नाम हमीद देशभक्ति का सपना जिसको भाया
बाँध कफ़न सिर घर से कर ज़िद सेना में वो आया
खाया कसम की दे दूँगा मैं देश को अपनी जवानी
हिन्द देश का रहने वाला था कोई तूफानी
जो था सच्चा हिंदुस्तानी, जो था सच्चा हिंदुस्तानी  

सेना में आकर हमीद ऐसे करतब दिखलाता
पहले से ही है ये प्रशिक्षित सबको भ्रम हो जाता
वीर जाँबाज जो बना हुआ था सबके लिए कहानी
हिन्द देश का रहने वाला था कोई तूफानी
जो था सच्चा हिंदुस्तानी, जो था सच्चा हिंदुस्तानी

जो होके जवान निज देश को दिया न कुछ
उसकी जवानी पे जवानी खुद रोती है
प्रेम-पाश में ही फँसा रहा महबूब के
वो क्या जाने जवानी की रवानी कैसी होती है
*आठ साल बीते जब चीन से लड़ा हमीद
दिखला दिया कि ये जवानी कैसी होती है
रुक नही सकती ये बाँध जैसा बांध लो जी
राह ढूँढ लेगी बहते पानी जैसी होती है

जो अशांति खातिर जन्मा शांति से न रह पायेगा
दिन-रात तबाही सोचेगा पर खुद तबाह हो जाएगा
पाकिस्तान सन पैंसठ में ये जुमला सच कर दिखलाया
निज भाई से ही लड़ बैठा और भारी मुँह की भी खाया

सितंबर सन पैंसठ की बेला  
पाक ने क्रूर खेल जब खेला


दन-दन लगा दागने गोला
अब्दुल जोश में जय-हिन्द बोला


पैंटुन टैंक अमरिका वाला
बना अभेद अचूक निराला


ज्वाला बरस रही थी बाहर
भिड़ने चला टैंक से नाहर


शोला उमड़ पड़ा था रण में
पहला टैंक उड़ाया क्षण में

बनकर अग्नि-पुञ्ज का झोंका
पैंटुन टैंक दूसरा रोका

आया एक दहकता गोला
ऊपर गिरा शेर के शोला

तीसरा टैंक निकट तब आया
मारा खण्ड-खण्ड छितराया

तब,
जान बचाकर लगे भागने गीदड़ पाकिस्तानी
हिन्द देश का रहने वाला था कोई तूफानी
जो था सच्चा हिंदुस्तानी, जो था सच्चा हिंदुस्तानी

दस सितंबर की यह घटना सन पैंसठ की जंग
देख हौसला एक वीर का हुआ जमाना दंग
चक्र-परमवीर **सात दिनों के भीतर ही वह पाया
तन अर्पण कर मातृभूमि को अब्दुल वीर कहाया

दे आशीष, लिखूँ विद्रोही बन, शारदा  भवानी
हिन्द देश का रहने वाला था कोई तूफानी
जो था सच्चा हिंदुस्तानी, जो था सच्चा हिंदुस्तानी

* 1954 में अब्दुल हमीद भारतीय सेना में भर्ती हुए।  आठ साल के दौरान ही चीन से युद्ध जिसमे बहादुरी के लिए सैन्य सेवा मेडल, समर सेवा मेडल एवं रक्षा मेडल दिया गया।
** दस सितंबर 1965 को शहीद वीर को 16 सितंबर 1965 को ही परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

मौलिक एवं अप्रकाशित
आशीष यादव

Views: 672

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष यादव on January 25, 2017 at 6:02am
Aadarniya Giriraj Bhandari Sir aapko yah creation achchha lga, mai dhanya hua.
Aadarniya Sir ji isme kewal ek hi dhun nhi h. Har jagah jarurat k hisab se alag alag dhun pr likha hu. Maine isko gaakar bhi dekha h.
Margdarshan ki apeksha me.
Saadar.
Comment by आशीष यादव on January 25, 2017 at 5:57am
Aadarniya Md Arif Sir. Aapko rachna pasand aai, bahut bahut dhanyawad. Sadar.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 24, 2017 at 8:57pm

आदरणीय आशीष भाई , देश भक्ति से सनी हुई रचना के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ । ऐसी रचनाओं मे अगर गेयता भी रहे तो और भी अच्छी लगतीं है , गेयता की कमी लगातार खलती रही है ।

Comment by Mohammed Arif on January 22, 2017 at 10:58pm
आदरणीय आशीष यादवजी,देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत रचना के लिए बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
8 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
yesterday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
Tuesday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service