For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आओ मिलकर दीप जलाएँ(नवगीत)/सतविन्द्र कुमार राणा

आओ मिलकर दीप जलाएँ

करने सबकुछ जगमग-जगमग
प्रेम रौशनी हम छितराएँ
आओ मिलकर दीप जलाएँ।

जो सरहद पर लगे हुए हैं
इसकी बस रक्षा करने को
इसकी खातिर तैयार खड़े
जो जीने को औ मरने को
शत्रु को निढाल बनाते हैं
उर में उनका मान बढ़ाएँ।
आओ मिलकर दीप जलाएँ

तन में तो मन धरा सभी ने
जीवन सबको मिला हुआ है
बस जीवन को काट रहे जो
शिक्षण जिनका हिला हुआ है
अज्ञान तिमिर में डूबे जो
ज्ञान सभी तक लेकर जाएँ
आओ मिलकर दीप जलाएँ।

प्रेम मिलन से खिलते उत्सव
सौहार्द इन्हीं से बढ़ता है
आपस में सब हिले-मिले हों
हर दिन उत्सव-सा चढ़ता है
सारी रंजिश को जीवन से
आओ सब ही दूर भगाएँ
आओ मिलकर दीप जलाएँ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 482

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on November 2, 2016 at 9:36pm

 

सुन्दर भावपूर्ण नवगीत के लिए बधाई, सतविन्द्र जी।

Comment by रामबली गुप्ता on November 1, 2016 at 5:51am
अव्वल तो सुंदर गीत के लिए हार्दिक बधाई लीजिये आद0 भाई सतविंदर जी।
कुछेक जगहों पर मुझे प्रवाह में अटकाव लगा यथा-
शत्रु को निढाल______।
अज्ञान तिमिर_______।
कहीं कहीं वक्यों में कसावट की कमी हो गयी है।
शत्रु को_____बढ़ाएं।
अज्ञान तिमिर_____जाएं।
इन वाक्यों में भाव उलझा हुआ प्रतीत हुआ।सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 31, 2016 at 6:46am
आदरणीय समर कबीर साहबसादर वन्दे!आपको प्रयास पसन्द आया,यह सार्थक हुआ बहुत बहुत आभार।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 31, 2016 at 6:45am
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब,प्रयास का अनुमोदन कर प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 31, 2016 at 6:44am
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब,प्रयास का अनुमोदन कर प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल आभार!
Comment by Samar kabeer on October 30, 2016 at 9:11pm
जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,दीपावली की बढ़िया सौग़ात दी है आपने मंच को,अच्छा सन्देश दे रहा है आपका नवगीत,इस प्रस्तुति के साथ ही दीपावली की बधाई और शुभकामनायें स्वीकार करें ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 30, 2016 at 2:51pm
दीपोत्सव को वर्तमान परिदृश्य व परिप्रेक्ष्य में संदर्भित करते हुए बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय सतविंदर कुमार राणा जी। दीपावली पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ आप सभी को।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
23 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
23 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। भाई तिलकराज जी द्वार…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए आभार।…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"तितलियों पर अपने खूब पकड़ा है। इस पर मेरा ध्यान नहीं गया। "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी नमस्कार बहुत- बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त निकाला विशेष बधाई के लिए भी…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service