For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ताटंक छ्न्द
-------------
1.उमर बढ़ी पर प्रीत लगाई,अब दूजी से जाने क्यों
नहीं पराई औरत है वह,बीवी इसको माने क्यों
पूरा दिन ही गिटर-पिटर बस, फोन लिए करते जाते
मुझे भुलाकर बात उसी से,ध्यान दिए करते जाते
2.
मैंने बोला नहीं दूसरी,लगा मीडिया प्यारा है
इसपे ही लिखता रहता हूँ,यह अच्छा औ न्यारा है
बोल पड़ी झटसे मुझसे वह,मुझको भी दिखलाओ तो
कैसे करते काम इसी पर,थोड़ा सा समझाओ तो
3.
उसे जरा सा यह मैंने तोे,बस यूँ ही बतलाया था
कैसे सोशल हम हो जाते,बस इतना समझाया था
लगी रहे अब वह सारा दिन,फोन नहीं मिल पाता है
तंग रहे दिल उसे देखकर ,अबतो बस घबराता है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 530

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 1, 2016 at 4:34pm
आदरणीय गोपाल सर परिमार्जित कर लिया है।मार्गदर्शन हेतु आभार ।सादर नमन
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 1, 2016 at 4:34pm
आदरणीया प्रतिभा जी प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन हेतु आभार सँग नमन।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 23, 2016 at 8:16pm

आदरणीय सतविंदर जी / सही शब्द तंग है बाकी आप स्वयम देख लें . सादर .

Comment by pratibha pande on August 23, 2016 at 9:46am

 छन्दों पर खूब  अभ्यास चल रहा है आपका.. विषय  भी रोचक चुना है  बधाई आपको आदरणीय सतविंदर जी ..  ' इसपे'  को' इस पर '   कर लेना ठीक होगा  

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 23, 2016 at 7:05am
अनुमोदन कर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहब। सादर नमन!
Comment by Samar kabeer on August 22, 2016 at 3:24pm
जनाब सतविंदर कुमार जी आदाब,आपके छन्द पसन्द आये,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service