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नव गीत.....
बेला महका.......


बेला महका चम्पा महकी
महकी है कचनार
झूम रहीं सब काकी बहनें
नृृत्य करें हर बार।

गाँव में शादी है होली
फूलों से सजती है डोली
संबन्धी ने भेजा न्योता
गाँव मेरे अब क्यों ना आता
बातों की भर मार।

रात रात भर बेला जागा
खिल न सका वह कहीं अभागा
कहीं गुंथ गया गजरे अन्दर
समझ रहा वह तुझे सिकन्दर
नहीं पा सकी पार।

बचपन बीता यौवन आया
शैतानी ने कदम बढ़ाया
तंत्र मंत्र और जादू टोना
मेज पोश का फटा है कोना
सब कुछ है बेकार|

तितली ने हैं पंख हिलाये
गौरैया ने पांव बढ़ाये
इस टहनी से उस टहनी तक
उस टहनी से इस टहनी तक
दौड़ रही हर बार।

आभा

अप्रकाशित एवं मौलिक 

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Comment

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Comment by Abha saxena Doonwi on August 22, 2016 at 10:12pm

आदरणीय  Vijay Nikore sb जी नमस्कार ,आपकी प्रतिक्रिया पा कर मैं बहुत प्रसन्न हूँ शुक्रिया  आपका ...

Comment by vijay nikore on August 22, 2016 at 4:07pm

अति सुन्दर नवगीत। हार्दिक बधाई।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 10, 2016 at 5:41pm
बहुत् सुन्दर नवगीत,हार्दिक बधाई आदरणीया आभा जी।
Comment by Samar kabeer on July 24, 2016 at 11:57pm
मोहतरमा आभा जी आदाब,बहुत सुंदर नवगीत रचा है, बधाई स्वीकार करें,बाक़ी ,जनाब रामबली गुप्ता जी बता ही चुके हैं ।
Comment by pratibha pande on July 22, 2016 at 8:00pm

बचपन बीता यौवन आया
शैतानी ने कदम बढ़ाया
तंत्र मंत्र और जादू टोना
मेज पोश का फटा है कोना
सब कुछ है बेकार|.....वाह  क्या अल्हड़ भाव हैं  ...हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीया  

Comment by Abha saxena Doonwi on July 22, 2016 at 7:05pm

आदरणीय राम बली गुप्ता जी नमस्कार , पहले तो  मैं  आपका धन्यवाद अदा करना चाहती  हूँ कि जो आपने मेरे इस नव गीत को इतने ध्यान से पढ़ा ...आपके  सभी  सुझाव उचित लगे  हैं  मुझे  ....  सुधार कर  लिया है  मैंने ...शुक्रिया  आपका ...

Comment by रामबली गुप्ता on July 22, 2016 at 11:16am
टंकण त्रुटि

*उड़ती बारम्बार*
Comment by रामबली गुप्ता on July 22, 2016 at 11:13am
आदरेया आभा जी बहुत ही सुंदर गीत रचा है आपने। हृदय से बधाई स्वीकारें। कुछेक स्थानों पर मुझे प्रवाह में अटकाव लगा। सुझाव निम्न हैं यदि आपके भावों के अनुकूल लगें तो विचार करियेगा।
1-शायद चम्पा स्त्रीलिंग है अतः प्रथम लाइन को * बेला-जूही-चम्पा महकी* प्रकार करके देखें।
2- *गांव में शादी है होली* लाइन में अटकाव है। *में* मे मात्रा पतन करना पड़ रहा है।
3-बेला स्त्रीलिंग है अतः *जागा* को *जागी* तथा *अभागा* को *अभागी* कर लीजिये।
4-*कहीं गुंथ गया गजरे अंदर* लाइन मे अटकाव है। इसे * कहीं गुँथा गजरे के अन्दर* प्रकार करके देकहिये। इसी प्रकार *तन्त्र-मन्त्र और जादू-टोना* में भी अटकाव है। इसे *तंत्र-मंत्र औ जादू-टोना* करके देखिए।
4-*हर बार* को दो जगह समान अर्थों में तुकांत के लिए प्रयुक्त किया गया है। इससे पुनरुक्ति दोष हो रहा है। अंतिम लाइन में *दौड़ रही हर बार* के स्थान पर उड़ाती बारम्बार* करके देखिए। पुनरुक्ति दोष दूर हो जायेगा।

उपर्युक्त के संदर्भ में अन्य सुधीजन भी विचारें। हो सकता है मैं गलत होवूं।

बाकी सब शुभ-शुभ

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