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उसे तो मुक्त होना  बस उसी की काहिली से है
कमी जो जिंदगी में यार  वो उसकी कमी  से है /1

जरा ये तो बताओ क्यों बुरा कहते हो किस्मत को
अगर है दूर मंजिल तो  समझ लो बुुजदिली से है /2

मनुज सब  एक से  ही हैं नहीं  छोटा बड़ा कोई
सभी का वास्ता  केवल उसी  इक  रोशनी से है /3

जहाँ गुजरा था इक बचपन सुहाना यार उसका भी
उसी  को  छोड़  आया  वो  बहुत  ही  बेदिली से है /4

हकीकत आप समझो या न समझो आप पर निर्भर
हमारा  जो  भी  रिश्ता  है  महज  उस सादगी से है /5

किसी  का  दर्द  अपना  सा  लगा  करता किसे यारो
सभी को आज मतलब क्यों महज अपनी खुशी से है /6

भले  ही  रंग कुछ  भरते  लतीफे  यार पल दो पल
मगर  हरदम  की रंगत तो ‘मुसाफिर’ शायरी से है /7
*****
मौलिक व अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 10, 2016 at 10:54am

आ० राहिला जी ग़ज़ल पर उपस्थिति और प्रशंशा के लिए हार्दिक धन्यवाद l

Comment by Rahila on March 9, 2016 at 12:57pm
"हकीकत आप समझो या न समझो आप पर निर्भर
हमारा जो भी रिश्ता है महज उस सादगी से है"वाह. .बहुत ही शानदार शेर हुआ।

"किसी का दर्द अपना सा लगा करता किसे यारो
सभी को आज मतलब क्यों महज अपनी खुशी से है "वाह-वाह ये तो बहुत ही जबरदस्त शेर हुआ आदरणीय सर जी! बहुत बधाई, पूरी ग़ज़ल ही काबिले तारीफ है।सादर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 9, 2016 at 11:27am

आ० भाई तेज वीर जी . ग़ज़ल की प्रशंशा के लिए हार्दिक आभार l

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 9, 2016 at 11:26am

आ० भाई राजेश जी , हार्दिक आभार .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 9, 2016 at 11:25am

आ० भाई शुशील जी , उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद l

Comment by TEJ VEER SINGH on March 8, 2016 at 9:44pm

हार्दिक बधाई लक्ष्मण धामी जी!बेहतरीन गज़ल!

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 8, 2016 at 6:49pm

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय 

Comment by Sushil Sarna on March 8, 2016 at 5:35pm

किसी का दर्द अपना सा लगा करता किसे यारो
सभी को आज मतलब क्यों महज अपनी खुशी से है /6

वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत खूब .... आपने प्रस्तुत ग़ज़ल में मानवीय अहसासों का बहुत सुंदर चित्रण किया है। दिली मुबारकबाद कबूल फरमाएँ सर।

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