For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

थाप पे तबले की ....


थाप पे तबले की ....

थाप पे  तबले  की  घुंघरू बजने लगे
किसने  पहचानी  इनकी  परेशानियां
दाम लगने लगे ज़िस्म थिरकने लगे
आई नज़र में नज़र तो बस हैवानियाँ
थाप पे तबले की ......

सब  खरीददार  थे  कोई  अपना न था
सूनी  आँखों  में  कोई भी सपना न था
चीर डाला  हर  एक  हाथ ने जिस्म को
बज़्म में चश्म से दर्द छलकना  न  था
शोर साँसों  की सिसकी का हर ओर था
हर  सिम्त  थी  बस नादान नादानियां
पाँव  घुंघरू  बंधे  महफ़िल में बजते रहे
किसने   पहचानी  इन  की  परेशानियां
दाम  लगने  लगे  ज़िस्म थिरकने लगे
आई  नज़र  में  नज़र तो बस हैवानियाँ
थाप पे तबले की ......

जिस्म  ही  जिस्म बेजान थे दूर तलक
उदास जिस्मों  में   थीं   बेनूर रानाईयां
हर ठुमके पे   सिक्कों   की   बरसात थी
थी  किस्मत   में बस इन की तन्हाईयाँ
मतलबी  बाज़ार  थे मतलबी रिश्ते वहां
हो  गयी  चुप सलवटों में कई कहानियाँ
तरबतर   खून   से   पाँव रक्स करते रहे
रक्स    आँखों   में   करती थी वीरानियाँ
दाम  लगने  लगे   ज़िस्म थिरकने लगे
आई  नज़र  में  नज़र  तो बस हैवानियाँ

थाप पे तबले की ......

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 443

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on February 14, 2016 at 1:56pm

आदरणीय    सतविंदर कुमार   जी प्रस्तुति में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on February 11, 2016 at 8:56am
भावों का बेहतरीन उद्गार हुआ है इस गीत में आदरणीय सुशिल सरना जी।सादर हार्दिक बधाई।
Comment by Sushil Sarna on February 9, 2016 at 9:11pm

आदरणीय     मिथिलेश वामनकर   जी प्रस्तुति में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 9, 2016 at 8:11pm
आदरणीय सुशील सरना सर
बहुत शानदार प्रस्तुति है हार्दिक बधाई आपको।
Comment by Sushil Sarna on February 9, 2016 at 7:31pm

आदरणीया    Samar kabeer    जी प्रस्तुति में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on February 9, 2016 at 7:31pm

आदरणीया    Rahila     जी प्रस्तुति में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on February 9, 2016 at 2:38pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह,इस शानदार प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकार करें !
Comment by Rahila on February 9, 2016 at 12:52pm
बहुत अच्छी रचना हुई आदरणीय सुशील सर जी! "जिस्म बेजान थे दूर तलक
उदास जिस्मों में थीं बेनूर रानाईयां
हर ठुमके पे सिक्कों की बरसात थी
थी किस्मत में बस इन की तन्हाईयाँ
मतलबी बाज़ार थे मतलबी रिश्ते वहां
हो गयी चुप सलवटों में कई कहानियाँ "दिल को छू गई ये पंक्तियां।बहुत बधाई आपको । सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
10 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service