For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

yeh meri pahli gazal hai is site par..... saath he saath jeeven me pahli baar ghazal likhne ki koshish ki hai aap sabhi ke sujhav amantrit hain




हाय मेरी मोहब्बत मोहब्बत ना रही.... यह तो अब एक फसाना हो गया............
रात ही तो आया था वो ख्वाब मे.... पर लगता है उससे मिले एक ज़माना हो गया

मुझे दिलासे दे देकर मुझसे भी ज़्यादा रोए हैं मेरी आँखो के आँसू.........
लगता है मेरा रोना उसके मुस्कुराने का बहाना हो गया...............................

हर जगह हर सूरत मे मुझे वो ही वो नज़र आता है हर दम......
मेरे ज़रूरी कामों मे शामिल हवा मे उसकी तस्वीर बनाना हो गया.......

मेरे घर की टपकती छत और कमरों की उड़ती रंगिनियत याद दिलाती हैं मुझे........
पल्लव तेरा यह छोटा सा घर अब बहुत पुराना हो गया.............

हर रोज़ बिकता हुआ देखता हूँ में दिलों को दुनिया क बाज़ार मे ...........
आम आज कल यहाँ इश्क़ की बोली लगाना हो गया.................


पल्लव

Views: 666

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pallav Pancholi on June 17, 2010 at 11:29pm
ravi ji dhanywad
Comment by Rash Bihari Ravi on June 17, 2010 at 4:50pm
bahut sunder
Comment by Pallav Pancholi on June 16, 2010 at 11:30pm
सतीश जी..... धन्यवाद
Comment by Pallav Pancholi on June 16, 2010 at 11:29pm
दुष्यंत जी आभार
Comment by Pallav Pancholi on June 16, 2010 at 11:29pm
रजनी जी ....... धन्यवाद... आपका आशीर्वाद बना रहे
Comment by Pallav Pancholi on June 16, 2010 at 11:26pm
गणेश जी आपका बहुत बहुत आभार..... आपकी आशाओं पर पूरा उतरने की कोशिश करूँगा
Comment by Pallav Pancholi on June 16, 2010 at 11:25pm
प्रभाकर जी.... धन्यवाद आपके परामश के लिए.... मैं उसे ज़रूर ध्यान रखूँगा... पुनः प्रशंसा हेतु आभार
Comment by satish mapatpuri on June 16, 2010 at 12:55pm
हर रोज़ बिकता हुआ देखता हूँ में दिलों को दुनिया क बाज़ार मे ...........
आम आज कल यहाँ इश्क़ की बोली लगाना हो गया.................
पल्लव जी, धन्यवाद. अच्छी रचना है. प्रभाकर जी के गुरुवत परामर्श पर जरुर गौर कीजिएगा.
Comment by दुष्यंत सेवक on June 16, 2010 at 11:56am
हर रोज़ बिकता हुआ देखता हूँ में दिलों को दुनिया क बाज़ार मे ...........
आम आज कल यहाँ इश्क़ की बोली लगाना हो गया.................

yogi sir se main rabta rakhta hu......halanki ham sab yaha seekhne ke liye hi aaye hain, prayas behtareen hai bas meter main baith jaaye. pallav ji pahli rachna ke liye badhai sweekaren. yogi sir ki aur anya sathiyo ki rachnao ko bhi padhiye. achche achchhe shayaro ko padhiye is chingaari ko jwala banaiye ....shubhkamnayen.....
Comment by rajni chhabra on June 16, 2010 at 9:04am
pyar ki gehrai se labrez,aapki gazal achi lagi,aur bhi likhte rahiyega

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service