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हम दर्द हो कितने बड़े

हमदर्द हो कितने बड़े..
2212-2212-2212-22

हो जो सियासत प्यार में रब भूल जाता हूँ
हमदर्द हो कितने बड़े तब भूल जाता हूँ

उम्दा है जबतक एक हैं कोई न हो मजहब
मैं प्यार में रब सारे मजहब भूल जाता हूँ

समशीर हाथो से हटा सजदा किया मैंने
हाँ मातृभूमी के लिए सब भूल जाता हूँ
रणभूमि में उतरूँ जो मैं सब भूल जाता हूँ
वादी हवा में मिल रहा अब अक्स है उनका
मैंख्वार मेरा मन सब सबब भूल जाता हूँ

हाँ तू वफ़ा है जिंदगी तेरी इनायत सब
तू साँस में मेरी बसी कब भूल जाता हूँ

मौलिक /अप्रकाशित
आमोद बिंदौरी

Views: 582

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Comment by amod shrivastav (bindouri) on October 30, 2015 at 2:31pm
आ गिरिराज सर नमन आभार
Comment by amod shrivastav (bindouri) on October 30, 2015 at 2:30pm
रणभूमि में उतरूँ जो मैं सब भूल जाता हूँ

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 30, 2015 at 12:19pm

आदरणीय -

आपकी बहर  ये है -- 2212-2212-2212-22

हाँ मातृभूमी के लिए सब भूल जाता हूँ

हाँ मा तृ भू  ---2212 

मी के लि ए  2212   (   अगर मातृमूमि कहेंगे  तो यहाँ मात्रा दूसरे रुकन की - मि के लिये 1212 हो जायेगा )

सब भू  ल जा 2212

ता हूँ   22  

आदरणीय सही शब्द लिखेंगे तो आपका मिसरा बे बहर हो जायेगा , इसी लिये आपने मातृ भूमी  लिख दिया ।  जो गलत उपयोग है ।
आप गलतियाँ करते रहना चाहते हों तो आप स्वतंत्र हैं ॥

Comment by amod shrivastav (bindouri) on October 30, 2015 at 12:00pm
आ गिरिराज सर मातृभूमि लिखे या मातृभूमी दोनों दशा में मंत्रा भार वही है क्यों की ई की मन्त्र भार लघु या गुरु गिना जाता है। अभी गुरु न होने के कारण मै ठीक से कंफर्म कर के बताऊ गा वैसे गजल उच्चारण प्रधान है उस दशा में भी वह सही है। बी बांकी गुरुजन जाने
Comment by amod shrivastav (bindouri) on October 30, 2015 at 11:55am
आ गिरिराज सर ,आ पंकज भाई,आ वा मिथलेश सर ,आप सभी का तहेदिल से आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 29, 2015 at 8:52pm

आदरणीय अच्छी गज़ल कही है , दिली बधाइयाँ आपको ।

मातृ भूमि को मातृभूमी करना उचित नही है , मात्रा मिलाने के लिये शब्दों की सही वर्तनी को बदना सही नही होता ॥

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 28, 2015 at 11:50pm
सुंदर ग़ज़ल पर बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on October 28, 2015 at 10:16pm

आदरणीय आमोद जी, इस प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on October 27, 2015 at 5:18pm
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर ग़ज़ल पर

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