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"हैलो..शोभा!कैसी हो।"
"मैं ठीक हूं । आप कैसे हैं?"
"बढ़िया,अरे सुनो मैं फिर नहीं आ पा रहा हूं।यहां सीमा पर माहौल लगातार खराब चल रहा है।छुट्टियों की अर्जियां निरस्त हो गयी।"
"दोबारा..भला ये क्या बात हुई"उसके स्वर में उदासी छा गई ।
"यूं उदास ना हो, फौजी की बीबी को हर हाल में सब्र रखना चाहिए।अच्छा ये बताओ..अगर आज स्वयं भगवान तुम्हें कोई वरदान मांगने को कहते तो क्या मांगती? "
"यही मांगती कि बस तुम इसी वक्त मेरे पास आ जाओ"
"ओह..प्रिय,कुछ और मांगना था । ये ख्वाइश तो भगवान ने पूरी कर दी।
वो पूरे साजो सामान के साथ ,फोन कान से लगाये, दरवाजे पर खड़ा,शरारत से मुस्कुरा रहा था ।
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Rahila on October 26, 2015 at 11:44pm
बहुत आभार आपका आदरणीय अजय कुमार शर्मा जी! आपकी छोटी सी सुन्दर टिप्पणी के लिये बहुत धन्यवाद ।
Comment by Ajay Kumar Sharma on October 26, 2015 at 10:34pm

अति सुंदर राहिला जी। अक्षरशः सत्य एहसास है।

Comment by Rahila on October 26, 2015 at 8:30pm
बहुत -बहुत आभार आद. प्रतिभा जी! आपको मेरी रचना मीठी लगी,और मैं आपके द्वारा मीठे से संबोधन में डूब गई । बहुत शुक्रिया ।
Comment by pratibha pande on October 26, 2015 at 8:23pm

 प्यारी और मीठी कहानी ,बधाई आपको प्रिय राहिला जी 

Comment by Rahila on October 26, 2015 at 8:03pm
बहुत शुक्रिया आदरणीय उस्मानी जी! आपको रचना पसंद आई ,मेरा लेखन सफल हुआ । बहुत आभार ।
Comment by Rahila on October 26, 2015 at 8:00pm
बहुत -बहुत आभार आपका आदरणीय नीरज कुमार जी ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 26, 2015 at 7:50pm
हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया Rahila जी इस सफल कथा के बढ़िया सृजन के लिए।
Comment by Neeraj Neer on October 26, 2015 at 7:00pm

बहुत सुंदर राहिला जी 

Comment by Rahila on October 26, 2015 at 5:22pm
आद. कांता दी आपकी स्नेहिल टिप्पणी का क्या कहूं कितना इंतेजार रहता है । बहुत आभार आपका आपको रचना पसंद आई । बहुत शुक्रिया ।
Comment by kanta roy on October 26, 2015 at 5:18pm

वाह !!! बहुत खूब मीठी सी शब्दों की सादगी लिए भावों का विस्तार का संवहन करते हुए सार्थक कथा हुई है। बधाई आदरणीय राहिला आसिफ जी।  

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