For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भयंकर भूल – (लघुकथा)

 महाराज युधिष्ठिर अपने  कक्ष में   सामंतों के साथ व्यस्त थे!तभी बाह्य द्वार पर युद्ध विजय के विजय घोष और शंख, नगाडे,ढोल आदि वाद्यों की आवाज़ हुई!युधिष्ठिर बाहर आये तो देखा कि लघु भ्राता भीम वाद्य-यंत्र वादकों को  निर्देश दे रहे थे!

"भ्राता भीम, अभी कोई युद्ध नहीं हुआ और ना  कोई युद्ध विजय  तो यह वाद्य यंत्र क्यों बजाये जा रहे हैं"!

"महाराज, क्षमा करें, आज आपने युद्ध से भी बडी विजय प्राप्त की है"!

"हम आपका आशय समझने में असमर्थ है, भ्राता भीम"!

"महाराज, अभी आपके पास जो विप्र आये थे, आपने उनको कल आने का आदेश दिया , इसका तात्पर्य यह हुआ कि आपने काल पर विजय प्राप्त कर ली, आप तो काल-जयी हो गये, अतः  विजय घोष तो होना ही चाहिये"!

"भ्राता भीम, आपने हमारी आंखें खोल दी, हम भयंकर भूल करने जा रहे थे!

हम स्वयं  विप्र महोदय के पास जायेंगे , क्षमा मांगेगे एवम उनकी समस्या हल करेंगे"!

.

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 877

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on September 2, 2015 at 2:06pm

आदरणीय तेज़वीर जी बहुत ही गूढ़ अर्थ लिए प्रभावशाली लघु कथा बन पड़ी है। दिल से दाद कबूल फरमाएं आदरणीय। 

Comment by Omprakash Kshatriya on September 2, 2015 at 1:17pm
आ तेज वीर जी आप बहुत ही दूर की कौड़ी ढूढ़ कर लेट है । बधाई इस सुन्दर रचना के लिए
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on September 2, 2015 at 12:45pm

अच्छी लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय तेज वीर जी

Comment by Tanuja Upreti on September 2, 2015 at 12:07pm

संदेशप्रद रचना हेतु बधाई आदरणीय 

Comment by TEJ VEER SINGH on September 2, 2015 at 11:29am

हार्दिक आभार आदरणीय प्रतिभा पान्डे जी!लघुकथा को समय देने के लिये और सराहने के लिये!पहले मैंने काल-जयी नाम ही सोचा था, फ़िर मुझे लगा कि काल जयी तो वे हुए ही नहीं,यही तो उनकी भूल थी जिसका अहसास भीम ने इस तरह से कराया और वे यह भयंकर भूल करने से बच गये!लघुकथा का आशय मात्र इतना है कि आज का काम कल पर मत टालो!सादर!

Comment by pratibha pande on September 2, 2015 at 9:59am
आदरणीय तेज़ वीर जी बहुत प्रभावशाली कथा है ,आप इसका शीर्षक अगर 'काल जयी'कर दें तो मेरे अनुसार प्रभाव दुगुना हो जायेगा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service