For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दुनिया बिलकुल छोटी है (ग़ज़ल) -- मिथिलेश वामनकर

22---22---22---2

 

फूलों में सरगोशी है

सच की खुशबू फैली है

 

मुमकिन को भी मायूसी

नामुमकिन कर देती है

 

चलती है बस ताकत की

लागर तो फरयादी है

 

मेरी जाँ की दुश्मन भी

मेरी ही नादानी है

 

मत पूछो क्या ग़ज़लों में ?

ये दुनिया ही दूजी है

 

मैंने पूछा कैसी हो ?

जाने माँ क्यों रोती है

 

सूरत में आवाजें हैं

सीरत में ख़ामोशी है

 

ख़्वाब मुफ़स्सल है लेकिन

दुनिया बिलकुल छोटी है

 

------------------------------------------------------------

(मौलिक व अप्रकाशित)  © मिथिलेश वामनकर

------------------------------------------------------------

Views: 818

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 26, 2015 at 2:18pm

आदरणीय दिनेश भाई जी, त्रुटी स्पष्ट करने के लिए हार्दिक आभार. एक रौ में लिखी ग़ज़ल है. छोटी बह्र में अभ्यास कर रहा हूँ लेकिन बात नहीं बन पा रही है. प्रयास जारी है. सादर 

Comment by Ravi Shukla on August 26, 2015 at 2:08pm

आदरणीय मिथिलेश जी

गज़ल का कथ्‍य बहुत पंसद आया । उसके लिये आपका आभार । हमें ऐसा क्‍यों लगा है कि यह ग़ज़ल ताजा कही हुई नहीं है इतने दिनों में आपके एक अंदाज के आदी हो गये है । क्षमा सहित निवेदन है क‍ि वो अंदाजे बयां यहां हमे नहीं मिल रहा । हो सकता है हम गलत हो ये हमारा विचार है ।

Comment by Harash Mahajan on August 26, 2015 at 1:59pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी ....छोटी बहर में एक नायाब ग़ज़ल....हर शेर अपने आप में सम्पूर्ण और एक दुसरे से जुडा  नज़र आता है ! इस बेतरीन प्रस्तुति के लिए बधाई ! साभार !1

Comment by दिनेश कुमार on August 26, 2015 at 1:48pm
इसी प्रकार यादें प्यारी लगती हैं, में रदीफ़ बदल गया है।
Comment by दिनेश कुमार on August 26, 2015 at 1:46pm
आदरणीय मिथिलेश भाई, खुशियाँ बहुवचन है, इसलिए रदीफ़ है की बजाय हैं हो रहा है। मिसरा दोबारा कह लीजिए

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 26, 2015 at 12:54pm

आदरणीय दिनेश भाई जी, ग़ज़ल की सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

आपने कहा टंकण त्रुटी हुई है सुधारकर 'वापस' करता हूँ. सादर 

Comment by दिनेश कुमार on August 25, 2015 at 6:16pm
बेहतरीन ग़ज़ल आ.मिथिलेश भाई। बहुत ख़ूब।

सूरत में आवाजें हैं
सीरत में ख़ामोशी है... बहुत ख़ूब

मत पूछो क्या ग़ज़लों में
ये दुनिया ही दूजी है... सहमत हूँ भाई। वाह

मतला भी बहुत अच्छा है। बस यह मिसरा ठीक कर लें भाई -- खुशियाँ वापिस मिलती है

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 25, 2015 at 5:08pm

आदरणीय सुशील सरना सर,  आप जैसे संवेदनशील रचनाकार से प्रशंसा पाना मेरे लिए बहुत मायने रखता है. ग़ज़ल के मुखर अनुमोदन से मुग्ध हूँ. जादूगर नहीं सर बिलकुल नया अभ्यासी हूँ. एक विशाल हृदय पाठक ने मान दिया ये मेरे लिए बड़ी बात है.  सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार. नमन 

Comment by Sushil Sarna on August 25, 2015 at 4:06pm

मेरी जाँ की दुश्मन भी
मेरी ही नादानी है

मत पूछो क्या ग़ज़लों में ?
ये दुनिया ही दूजी है

वाह आदरणीय मिथिलेश जी बहुत ही मासूम खूबसूरत ग़ज़ल की प्रस्तुति हुई है। अगर आपको ग़ज़लों का जादूगर कहा जाए तो अतिश्योक्ति न होगी। बहरहाल इस दिलकश प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service