For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मफ़ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फ़ाइलुन

सब छोड़ छाड़ हम्द-ओ-सना में लगा रहा
आफ़त पड़ी जो सर प दुआ में लगा रहा

अब उससे नेकियों की तवक़्क़ो फ़ुज़ूल है
जो सारी उम्र जुर्म-ओ-सज़ा में लगा रहा

सीने में अपने झाँक के देखा नहीं कभी
हर सम्त वो तलाश-ए-ख़ुदा में लगा रहा

हिम्मत थी जिसमें ,छीन लिया बढ़ के अपना हक़
मजबूर था जो आह-ओ--बुका में लगा रहा

अच्छाई उसको छू के भी गुज़री नहीं कभी
उसका दिमाग़ सिर्फ़ ख़ता में लगा रहा

मैंने तो जान बूझ के धोया नहीं कभी
उसके लहू का दाग़ क़बा में लगा रहा

एह्ल-ए-जफ़ा ने ख़ूब रचीं साज़िशें "समर"
जो था वफ़ा परस्त,वफ़ा में लगा रहा

------
हम्द-ओ-सना :- ईश्वर की तारीफ़ (भक्ति)
तवक़्क़ो :- आशा
सम्त :- दिशा
आह-ओ-बुका :-चीख़ चीख़ के फरियाद करना
मक़नातीस :- चुम्बक
साज़िशें :- षडयंत्र
------

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 835

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by दिनेश कुमार on August 7, 2015 at 5:21pm
बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय। मैं भी मिथिलेश भाई से सहमत हूँ कि आदरणीय समर कबीर जी. आपकी ग़ज़लों से हमेशा ग़ज़ल कहने का सलीका सीखने को मिलता है. सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 7, 2015 at 1:34pm

आदरनीय समर कबीर जी मैं भी आदरणीय मिथिलेश जी बातों से पूरे तरह इत्तेफाक रखता हूँ ,,आपकी ग़ज़ल से वाकई बहुत कुछ सीखने को मिलता है ..चाहें वो आपकी खुद की ग़ज़ल हो या दोसरों की ग़ज़लों पर आपकी प्रतिक्रिया ..मैं बहुत ध्यान से पढता हूँ और अमल में लाने की कोशिस करता हूँ इस रचना के लिए ढेर सारे बधाई के साथ सादर

Comment by Ravi Shukla on August 7, 2015 at 11:30am

आदरणीय समर कबीर जी

शानदार ग़ज़ल हुई है दिली दाद कुबूल करें मिथिलेश जी की बात से हम भी सहमत है आपकी ग़ज़ल से सीखने का सलीका मिलता है

और आप की फराख दिली भी आज देखने को मिली । ओ बी ओ मंच को सादर नमन । और ग़ज़ल के लिये फिर से हर शेर पर दाद हाजिर है ।

Comment by Samar kabeer on August 6, 2015 at 10:45pm
जनाब मिथिलेश वामनकर जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 6, 2015 at 10:43pm
जनाब "जान" गोरखपुरी साहिब,आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ,मेरा मक़सद किसी धर्म विशेष पर टिपण्णी करना नहीं था,शैर जिस मक़सद को सामने रख कर कहा था लगता है पाठकों की उस तक रसाई नहीं हो सकी,मेरे शैर से अगर किसी का दिल दुखा है तो मैं मुआफ़ी चाहता हूँ,एडमिन साहिब से गुज़ारिश कर दी है ,यह शैर ग़ज़ल से निकाल दिया जाएगा ।
Comment by Harash Mahajan on August 6, 2015 at 10:36pm
आ0 समर जी आपकी पेशकश बहुत ही बेहतरीन हुई है । मेरी जानिब से आपकी इस ग़ज़ल पर ढेरों दाद । साभार ।
Comment by Samar kabeer on August 6, 2015 at 10:26pm
जनाब एडमिन साहिब,मेरी ग़ज़ल का ये शैर :-

"ताक़त थी मक़नातीस की जादू नहीं था वो
बुत सोमनाथ का जो हवा में लगा रहा"

कृपया अपने तत्काल प्रभाव से मेरी ग़ज़ल से निकाल दें ।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 6, 2015 at 8:52pm

सीने में अपने झाँक के देखा नहीं कभी
हर सम्त वो तलाश-ए-ख़ुदा में लगा रहा

आ० समर सर बहुत सुन्दर गज़ल हुयी है! बधाई!

पर मुझे इस शेर पर सख्त आपत्ति है और निवेदन करता हूँ आ० के कृपया ये शेर गज़ल से ख़ारिज करें-

ताक़त थी मक़नातीस की,जादू नहीं था वो
बुत सोमनाथ का जो हवा में लगा रहा

चुम्बक की ताकत रही हो, जादू रहा हो, या बनाने वाले की महारथ या भगवान् का चमत्कार... इस तरह की धार्मिक बातों का खंडन जिसके बारे में कोई स्पस्ट नही जानता उस पर अपने मत अनुसार शेर कहना सही नही है!आ० बुतपरस्ती के किलाफ शेर कहिये ठीक है,किसी कुप्रथा पर शेर हो ठीक है पर किसी धर्म की मान्यता पर विशेषकर नाम लेकर शेर कहना मुझे सरासर गलत लगता है! आ० समर सर आप हर तरह से मुझसे वरिष्ठ है मुझे पूर्ण विशवास है के आप मेरे भाव को समझ सकेंगे! सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 6, 2015 at 12:25pm

आदरणीय समर कबीर जी बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई है. शेर दर शेर दाद कुबूल फरमायें. आपकी ग़ज़लों से हमेशा ग़ज़ल कहने का सलीका सीखने को मिलता है. सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service