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गुस्से से उबल रहे थे चौहान जी , प्रदेश के कई भागों से दंगे की खबरे आ रहीं थी | उनको लग रहा था कि काश उनको मौका मिले तो वो उन सब को सबक सिखा दें | अचानक उनको याद आया और पूछा " रामलीला की सारी तैयारी हो गयी , रावण का पुतला बन गया कि नहीं ?
" हाँ , पुतला बन के आ गया है | वो पैसे लेने आया है , दे दीजिये "|
" ठीक है , भेज दो उसको अंदर "|
" कितना हुआ रहीम ?
" अरे जितना देना हो , दे दीजिये | इस काम के पैसे का भी मोल भाव करूँगा "|
रहीम की बात सुनकर उनको कुछ तो हुआ और यकबयक उनके हाथों ने रहीम की हथेली को कस कर पकड़ लिया |
मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 21, 2015 at 10:33am
हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर
Comment by विनय कुमार on July 21, 2015 at 12:24am

बहुत बहुत आभार आदरणीय प्रतिभा पाण्डेय जी..

Comment by विनय कुमार on July 21, 2015 at 12:23am

बहुत बहुत आभार आदरणीय वीर मेहता जी , आपके प्रोत्साहन से सम्बल मिलता है..

Comment by विनय कुमार on July 21, 2015 at 12:22am

बहुत बहुत आभार आदरणीय प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी..

Comment by pratibha pande on July 20, 2015 at 10:31pm

कोई  कितना भी जोर लगा  ले , हमारी गंगा जमुनी  संस्कृति को तोड़ नहीं सकता I इतनी  बढ़िया लघु कथा के लिए  आपको बधाई सादर 

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on July 20, 2015 at 10:20pm
बहुत सुन्दर भाव लिये उम्दा रचना आदरणीय विनय कुमार जी।
इस खूबसुरत लघुकथा के लिये सादर बधाई स्वीकार करे।
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 20, 2015 at 10:02pm

बढ़िया  लघु कथा , सादर बधाई आदरणीय विनय कुमार सिंह जी 

Comment by विनय कुमार on July 20, 2015 at 9:56pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी | तहज़ीब तो हमारी सर्व धर्म समभाव की ही है , कुछ छद्म ताक़तें इसको तोड़ने पर लगी रहती हैं | लघुकथा आपको पसंद आई , सादर धन्यवाद..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 9:52pm

धार्मिक अनुष्ठान में ,धार्मिक इमारतों को बनाने में सभी धर्म के लोग हिस्सा लेते हैं सबको पता है मालिक/भगवान एक है फिर भी धर्मो में टकराव क्यूँ है ?इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नहीं| सीख  देती हुई पञ्च लाइन बहुत- बहुत बधाई विनय कुमार जी.   

Comment by विनय कुमार on July 20, 2015 at 9:40pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी | आपकी प्रतिक्रिया उत्साह बढ़ा देती है , सादर धन्यवाद ..

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