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तेज़ है दुनिया की निगाह बहुत-ग़ज़ल

2122 1212 112/22
सर्द है आज मेरी आह बहुत
फिर उठी दिल में तेरी चाह बहुत

खुदनुमाई से बाज़ आ नादाँ
तेज़ है दुनिया की निगाह बहुत

तोड़ना दिल किसी का क्या मुश्किल
हाँ कठिन इश्क़ की है राह बहुत

सोच उनकी है साइलों जैसी
पर बने फिरते हैं वो शाह बहुत

हश्र के रोज़ देख लेना तुम्हें
याद आयेगा हर गुनाह बहुत

मौलिक,अप्रकाशित

Views: 509

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 9, 2015 at 8:20pm

ऐसी सोच और फ़िक्र को सलाम --  

सोच उनकी है साइलों जैसी
पर बने फिरते हैं वो शाह बहुत

हश्र के रोज़ देख लेना तुम्हें
याद आयेगा हर गुनाह बहुत

वाह ! बहुत खूब !!

Comment by वीनस केसरी on June 4, 2015 at 1:20pm

सोच उनकी है साइलों जैसी
पर बने फिरते हैं वो शाह बहुत

वाह वा बहुत खूब

Comment by shree suneel on June 4, 2015 at 8:59am
खुदनुमाई से बाज़ आ नादाँ
तेज़ है दुनिया की निगाह बहुत.. . वाह!!
सर्द है आज मेरी आह बहुत
फिर उठी दिल में तेरी चाह बहुत... ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई आपको आदरणीय.
Comment by Samar kabeer on June 4, 2015 at 12:01am
जनाब शिज्जु "शकूर" जी,आदाब,

"इतनी अच्छी ग़ज़ल कही तुमने
दिल से निकली है वाह वाह बहुत"

मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 3, 2015 at 10:39pm

बेहतरीन गजल! दिल से ढेरों दाद पेश है आ० शिज्जू सर!

सादर!

Comment by मनोज अहसास on June 3, 2015 at 10:31pm
बेहतरीन
शुक्रिया साझा करने के लिये
सादर
Comment by maharshi tripathi on June 3, 2015 at 10:17pm

तोड़ना दिल किसी का क्या मुश्किल
हाँ कठिन इश्क़ की है राह बहुत,,,,,,,,,,,,,वाह बढ़िया आ. शिज्जु "शकूर" जी |

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