For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कवि की मृत्यु के बाद / गीत (विवेक मिश्र)

दूर कोई कवि मरा है

जो मुखर संवेदना थी
आज कोने जा लगी है
थक चुका आक्रोश है यूँ
मौन इसकी बानगी है

अब इन्हें स्वर कौन देगा?
भाग्य का ही आसरा है

अनगिनत सी भावनायें
बीजता रहता है यह मन
किन्तु विरले जानते हैं
भावनाओं पर नियंत्रण

कब किसे है छाँटना और
कौन सा पौधा हरा है?

लेखनी जर्जर पड़ी है
पृष्ठ रस्ता तक रहे हैं
भाव, शब्दों से कहें अब
'हम अकेले थक रहे हैं'

पूर्ण है 'मुख' गीत का, पर
क्यों अधूरा अन्तरा है?


(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 663

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kanta roy on May 12, 2015 at 12:03pm
लेखनी जर्जर पड़ी है
पृष्ठ रस्ता तक रहे हैं
भाव, शब्दों से कहें अब
'हम अकेले थक रहे हैं........... उफ्फ !!! कवि का मरना मरना है कलम का ...मरना है मन मस्तिष्क के संग्राम का ........ बहुत ही भावपूर्ण और गुढ़ लेखन ....बधाई आपको आदरणीय विवेक मिश्र जी
Comment by विवेक मिश्र on May 1, 2015 at 3:11am
आप सभी की टिप्पणी से रचना सार्थक हुयी। सभी गुणीजनों का हार्दिक आभार।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 28, 2015 at 11:07pm

भाई विवेक जी, बहुत दिनों बाद आपकी कोई रचना पढने को मिली है, बेहद सार्थक और भाव प्रधान गीत प्रस्तुत हुआ है, बधाई स्वीकार कर लेंगे, कृपया.

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 28, 2015 at 7:24am

वाह बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ती .....सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 27, 2015 at 11:46pm

भाई विवेक को इस मंच पर अरसे बाद देख कर उन्मन हूँ. जिस मनोविज्ञान के अंतर्गत इस गीत की रचना हुई है उसके व्यावहारिक पक्ष की अपेक्षा है भावों-भावनाओं को शब्द देने का क्रम अस्थायी बाधा से दुष्प्रभावित न हो.
सशक्त किन्तु निरीह निरुपाय व असहाय कवि की मनोदशा को खूब स्वर मिले हैं.
साधु-साधु

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 27, 2015 at 8:25pm

दूर कोई कवि मरा है--------यह पंक्ति कवि के सम्मान की रक्षा नहीं करती . ऐसा कर सकते हैं -भव -सिन्धु कवि कोई तरा है .  सादर .

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 27, 2015 at 6:35pm
बधाई, सुन्दर प्रस्तुति ,

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 27, 2015 at 3:52pm
वाह वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
रचना की गेयता ने मुग्ध कर दिया।
आदरणीय विवेक जी इस सुन्दर रचना पर दिल से बधाई।
Comment by Shyam Narain Verma on April 27, 2015 at 12:12pm
इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
6 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
8 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"*पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूपसुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
9 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service