For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं झूमता चला हूँ : हरि प्रकाश दुबे

22--22—22--22--22—2

मैं तो हूँ फ़कीर मैं झूमता चला हूँ

आदाब कर खुदा को नाचता चला हूँ

 

मस्त हूँ ख़ुशी मैं कहूं इसे ही जीना

गम के भँवर मैं मस्त तैरता चला हूँ

 

मौत क्या बला है मैंने इसे न जाना

जिंदगी मिली है बस भागता चला हूँ

 

बड़ी ख़ाक छानी पहले हुआ परेशां

नसीब को नाज़ तले रौंदता चला हूँ      (नाज़= कोमलता)

 

शक हो किसी के दिल में तो आजमाले

इस देह को न’अश को सौंपता चला हूँ   (न’अश = ताबूत)

 

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित”   

Views: 657

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on March 10, 2015 at 7:10pm

आदरणीय गिरिराज सर ,उत्साहवर्धन के लिए  बहुत- बहुत धन्यवाद आपका ! सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 10, 2015 at 11:04am

आदरणीय हरि प्रकाश भाई  , बहुत बेहतरीन प्रयास हुआ है ग़ज़ल का , बढ़िया शे र कहे हैं , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ॥

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 11:09pm

आदरणीय श्याम मठपाल जी ,रचना पर आपकी उत्साहजनक प्रतिक्रिया से मन प्रसन्न है , आभार आपका ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 10:54pm

भाई महर्षि त्रिपाठी जी ,बहुत बहुत धन्यवाद आपका ! सस्नेह 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 10:52pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव सर ,आपके रचना पर दो शब्द भी एक उत्प्रेरक का काम करतें है , आभार आपका  ! सादर !

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 10:47pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर ,  सच मैं आप की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धन करती है ,और सतत कुछ लिखने को प्रेरित करती है, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार,  ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 10:43pm

भाई कृष्णा मिश्र जी ,रचना आपको पसंद आई ,आपका आभार ,तक्तीअ क्या बाला है ,अभी मैं भी समझ ही रहा हूँ , दरअसल गज़क विधा मुश्किल सी लग रही है अभी , थोडा थोडा प्रयास  चल रहा है ! सादर 

Comment by Shyam Mathpal on March 9, 2015 at 9:12pm

Aardarnya Dube Sb.,

Kya baat hai anand aa gaya. Dil ko choo gaee ..  Bahut shukriya. Badhai.

Comment by maharshi tripathi on March 9, 2015 at 5:59pm

अच्छी रचना पर बधाई आ.हरिप्रकाश  जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 9, 2015 at 12:31pm

हरि प्रकाश जी

अच्छा प्रयास है i सादर i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service