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हमें  इज़ाज़त  मिले  ज़रा  हम  नई  सदी  को  निकल  रहे है

जवाँ परिंदे  उड़ानों की अब,   हर  इक  इबारत  बदल  रहे हैं।*

 

गुलाबी  सपने  उफ़क  में  कितने  मुहब्बतों  से  बिखर गए है

नया  सवेरा  अज़ीम करने,  किसी  के  अरमां  मचल  रहे  है।

 

मिले  थे  ऐसे  वो  ज़िन्दगी  से,  मिले  कोई जैसे अजनबी से

हयात से जो  मिली  है  ठोकर  जरा - जरा  हम  संभल रहे है।

 

अजीब महफ़िल, अजीब आलम, अजीब हस्ती, अजीब मस्ती

किसी  के  अहसास  पल रहे है  किसी के  ज़ज्बात जल रहे है।

 

बुजुर्गों अपनी ‘नसल’ पे तुम  भी  यकीन  इतना जुरूर रखना

बड़े अदब से  औ  एहतियातन  जमाना  हम  तो  बदल रहे है।

 

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(मौलिक व अप्रकाशित)  © मिथिलेश वामनकर 
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* आदरणीय गिरिराज सर द्वारा सुझाये संशोधन पश्चात् मिसरा.

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 19, 2015 at 8:26pm

आदरणीय डॉ.कंवर करतार 'खन्देह्ड़वी' जी सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार. 

Comment by कंवर करतार on February 19, 2015 at 8:24pm

भाई मिथिलेश,अती सुंदर ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद /बधाई I


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 19, 2015 at 8:11pm

आदरणीय दिनेश भाई जी बड़ी ही मधुर बह्र है, गुनगुनाते हुए लिख लेता हूँ, अभी वैसी पकड़ नहीं आई है. कोशिश जारी है.

Comment by दिनेश कुमार on February 19, 2015 at 8:04pm
Kya baat hai....मैं अभी तक इस खूबसूरत बह्र पर नहीं लिख पाया हूँ। हालांकि कोशिश भी नहीं की है। आप तो इस पर पकड़ बनाए हुए हैं। वाह वाह

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 19, 2015 at 7:58pm

चलो पड़ी तो नज़र ज़रा सी जो दाद पाई यकीन आया 

दिनेश भाई का शुक्रिया ये ग़ज़ल कही औ सफल रहे है 

Comment by दिनेश कुमार on February 19, 2015 at 7:30pm
आदरणीय मिथिलेश भाई जी, इस ग़ज़ल पर आज ही नजर पड़ी। आप ने तो कमाल किया हुआ है। वाह वाह वाह। दाद कबूल करें।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 19, 2015 at 7:08pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी सर, इस सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 19, 2015 at 11:08am

आ० भाई मिथिलेश जी , is बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई . .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 18, 2015 at 7:56pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपकी टिप्पणी देखकर ही दिल खुश हो जाता है उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया, सस्नेह सराहना के साथ हो तो बस झूम जाता हूँ. आपके स्नेह से सदा की तरह अभिभूत हूँ. रचना पर आपकी उपस्थिति से मान बढाने के लिए हृदय से आभार. नमन 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 18, 2015 at 7:53pm

आदरणीय सोमेश भाई जी सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार. आप स्वयं एक अच्छे रचनाकार है इसलिए आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए सदा से अमूल्य रही है. हार्दिक धन्यवाद 

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