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दिल से दिल के तार................................

दिल से दिल के तार जुड़े संतूर जहाँ में बजते हैं

छंद पहेली गीत ग़ज़ल जब दूर जहाँ में सजते हैं

रुनझुन-रुनझुन घुंघरू आहट  का संदेशा लाती है

ताल मिलाती धड़कन से मगरूर जहाँ में लगते है

अंतस मन मेल हुआ दिलबाग रूमानी गुलशन है  

रुखसार गुलाबी होंठ शबाबी नूर जहाँ में लगते हैं

हया लबों पे खेल रही है नज़र नज़ाकत शानी है

कोयल किस्से कहती है मशहूर जहाँ में लगते हैं

नैन नख्श नखरों पे है नायाब नवेली नज्म अदा

फिदा फ़साने पर आनंद वो चूर जहाँ में लगते हैं

@आनंद 14/०२/२०१५ "मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 16, 2015 at 10:33am

बहुत सुन्दर !! आदरणीय आनन्द भाई , बधाइयाँ ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 15, 2015 at 6:30pm

बहुत सुंदर प्रस्तुति , बधाई आदरणीय आनंद जी.

Comment by umesh katara on February 15, 2015 at 4:00pm

वाहहह सुन्दर


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 15, 2015 at 3:02pm

इस प्रयास पर बधाई प्रेषित है.

Comment by Hari Prakash Dubey on February 15, 2015 at 10:56am

आदरणीय आनंद जी सुन्दर रचना ,बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 15, 2015 at 3:02am

प्रस्तुति हेतु बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 14, 2015 at 8:19pm

अच्छी रचना है i

सादर i

Comment by maharshi tripathi on February 14, 2015 at 8:14pm

सुन्दर रचना पर बधाई स्वीकार करें भाई आनंद जी |

कृपया ध्यान दे...

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