For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपनी ही परछाई से डर लगता है

मुझको इस तन्हाई से डर लगता है

 

साथ देखकर भाईयों का जग डरता

भाई को अब भाई से डर लगता है

 

मनमोहक है भोलापन उसका इतना

दुनिया की चतुराई से डर लगता है

 

मौन रहूं या झूठ कहूं उलझन में हूं

लोगों को सच्चाई से डर लगता है

 

सारा जीवन सहराओं में भटका हूं

मुझको अब अमराई से डर लगता है

 

कानों में इक सिसकी सीसा घोल गई

मुझको अब शहनाई से डर लगता है

 

ग़म की धूप गई झुलसा इतना मन को

अब सुख की जुन्हाई से डर लगता है

 

साथ निभाऊं शेरों का बेख़ौफ़ मगर

भेड़ों की अगुवाई से डर लगता है

 

सीपी से मन बहलाना है मजबूरी

सागर की गहराई से डर लगता है

 

दूर हमेशा रहा बुराई से लेकिन

कभी कभी अच्छाई से डर लगता है

 

सदियों से क्यूं बाले हो ‘खुरशीद’ जिगर ?

‘क्यूं कि मुझे कजलाई से डर लगता है’

 जुन्हाई= चाँदनी 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 534

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on December 25, 2014 at 6:10pm

आदरणीय खुरशीद खैरादी जी.....बहुत खूब कह दिया आपने 

दूर हमेशा रहा बुराई से लेकिन

कभी कभी अच्छाई से डर लगता  है....हार्दिक बधाई !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2014 at 12:27pm

खुरशीद जी

क्या कहूं i ऐ मेरे जाने गजल  i

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 25, 2014 at 11:21am
साथ निभाऊं शेरों का बेख़ौफ़ मगर
भेड़ों की अगुवाई से डर लगता है ।
दूर हमेशा रहा बुराई से लेकिन
कभी कभी अच्छाई से डर लगता है ।
क्या खूब कहा है। बहुत बढ़िया ग़ज़ल बानी है , आदरणीय खुर्शीद खैरादी जी , बधाई , सादर।
Comment by Shyam Narain Verma on December 25, 2014 at 10:18am

आपको इस उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 25, 2014 at 9:58am

बहुत सुंदर ग़ज़ल है जनाब बहुत बहुत बधाई हो आपको

Comment by gumnaam pithoragarhi on December 25, 2014 at 9:06am

साथ देखकर भाईयों का जग डरता

भाई को अब भाई से डर लगता है

 

हर एक शेर कमाल हुआ है वाह वाह

Comment by ajay sharma on December 24, 2014 at 10:33pm

bahut hi umda gazal 

Comment by somesh kumar on December 24, 2014 at 8:49pm

आप की इस गज़ल के लिए शब्द नहीं मिल रहे ,बस इतना कहना चाहूँगा ,डर के आगे जीत है और अंधरे के बाद उजाला ,खुसुरत गज़ल पे दिल से दाद 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 24, 2014 at 8:02pm

मौन रहूं या झूठ कहूं उलझन में हूं

लोगों को सच्चाई से डर लगता है

बेहतरीन ग़ज़ल की हार्दिक शुभकामनायें 

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 24, 2014 at 7:08pm
मनमोहक है भोलापन उसका इतना
दुनिया की चतुराई से डर लगता है

वाह वाह वाह बहुत सुन्दर ! आदरणीय!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
5 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
15 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
21 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service