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ग़ज़ल-मुद्दतों से वो तेरी तस्वीर धुँधलाती नहीं

2122 2122 2122 212
---------------------------------
तंग सी तेरी गली की याद वो जाती नहीं 
मुद्दतों से वो तेरी तस्वीर धुँधलाती नहीं
..
बे-जबाबी हो चुके हैं ला-ज़बाबी ख़त मेरे 
क्या मेरी चिट्ठी तेरे अब दिल को धड़काती नहीं
..
खत्म होने को चला है सिलसिला तेरा मेरा 
बेव़फाई पर तेरी क्यों आके पछताती नहीं
..
झूठ से तकदीर लिखना खूब आता है तुझे
लूटकर तू दिल किसी का लौट कर आती नहीं
..
खौफ़ हावी हो चुका है आज तेरा शहर में
कत्ल करके भी तेरी आबाज़ घबराती नहीं

उमेश कटारा
मौलिक व अप्रकाशित
..


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Comment by umesh katara on November 14, 2014 at 8:44pm

तहेदिल से शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 13, 2014 at 8:58pm

झूठ से तकदीर लिखना खूब आता है तुझे
लूटकर तू दिल किसी का लौट कर आती नहीं----वाह वाह 

बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है आ० उमेश जी बहुत- बहुत बधाई 
..

Comment by umesh katara on November 13, 2014 at 9:32am

शुक्रिया श्याम नाराइन जी

Comment by umesh katara on November 13, 2014 at 9:31am

शुक्रिया योगराज प्रभाकर जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 12, 2014 at 11:34am

 बहुत खूब आ० उमेश कटारा जी।

Comment by Shyam Narain Verma on November 12, 2014 at 10:28am

इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by umesh katara on November 12, 2014 at 9:44am

शुक्रिया सोमेश कुमार जी आपका

Comment by somesh kumar on November 11, 2014 at 11:32pm

bejwabi-lajwabi -dhdkati me ye chitthi ,wah gzb dha diya aap ne 

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