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बहुत दिनों की खोजबीन के बाद परा -वैज्ञानिक उस औरत में घुसने वाले भूत पर सिर्फ इतना निष्कर्ष निकाल पाये , कि जिस रात इसका पति इसे बेहिसाब मारता है ,अगली सुबह इस औरत में वो भूत आता है !

.

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment by Shubhranshu Pandey on October 28, 2014 at 11:29am

भूत का सम्बन्ध लातों से ही है...

सुन्दर कथा,

सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 14, 2014 at 10:57am

एक मानसिक प्रक्रिया के तहत क्रोध का वमन होना अनिवार्य है जब उसे कोई रास्ता नहीं मिलता तो वो इस तरह की मानसिक अब्नोरमल्टी के तहत निकलता है जिसको रूढ़िवादी अंधविश्वासी लोग भूत का असर मानने लगते हैं ऐसे लोगों को नसीहत है ये लघु कथा बहुत बढ़िया बधाई आपको .

Comment by Neeles Sharma on October 14, 2014 at 7:03am

विनय सर , आभारी हूँ आपका !

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 13, 2014 at 11:13pm

बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय निलेश जी, हार्दिक बधाई आपको

Comment by khursheed khairadi on October 13, 2014 at 10:28pm

आदरणीय नीलेश जी अंधविश्वासों पर अच्छा प्रहार है |सादर अभिनन्दन 

Comment by विनय कुमार on October 13, 2014 at 8:21pm

बहुत सुन्दर लघुकथा नीलेश जी | बधाई ..

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