For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक ऐसी सास -- डा० विजय शंकर

श्वसुर के निधन पर रात भर की यात्रा पूरी करके वह घर में घुसी ही थी कि एक बार फिर जोर से रोना शुरू हो गया . वह अपनी सास से लिपट के रोये जा रही थी और उन्हें सांत्वना भी देती जा रही थीं . रिश्तेदार दोनों को समझाने, चुप कराने में लगे थे . थोड़ी देर बाद सब आगे की व्यवस्था में लग गए पर उसके आंसू जैसे रुक ही नहीं रहे थे , रोते रोते बोली , " यह कल ही होना था , कल मेरा जन्मदिन था . अब मैं अपना जन्मदिन कभी नहीं मनाऊँगीं " . सास अब तक कुछ संयत हो चुकी थीं , बड़े प्यार से बहू का सर सहलाते हुए बोलीं, " नहीं , क्यों नहीं मनायेगें , हर साल मनाएंगें , पापा को याद करेंगें और तुम्हारे बहाने खुश भी हो लिया करेंगें " .

मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 551

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 1, 2014 at 12:00pm
प्रिय जीतेन्द्र जी , आपने कथा को पसंद किया , धन्यवाद ।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 31, 2014 at 12:03pm

अच्छा लगा आपकी लघुकथा पढ़कर. बहुत सही विषय पर साझा हुई है. आदरणीय शुभ्रांशु जी व् आदरणीय डा. गोपाल जी की विचारों से पूर्ण सहमत हूँ. बहुत-२ बधाई आपको सर

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 29, 2014 at 2:49pm
आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , आपने कथा को गंभीरता प्रदान की , धन्यवाद. आपकी टिप्पड़ी विचारणीय है , आभार .
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 29, 2014 at 12:15pm

विजय सर !

आपने सच कहा  i  गम को सहेज कर बैठना जिन्दगी नहीं है  पर हमें संवेदन शून्य भी नहीं होना चाहिए I

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 28, 2014 at 10:45pm
आदरणीय महिमा श्री जी कथा को सकारामक्ता के साथ स्वीकृति प्रदान करने के लिए धन्यवाद .
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 28, 2014 at 10:42pm
आदरणीय शुभ्रांशु पाण्डेय जी कथा को एक अच्छे उदाहरण के साथ स्वीकृति प्रदान करने के लिए धन्यवाद .
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 28, 2014 at 10:40pm
आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी कथा को स्वीकृति प्रदान करने के लिए धन्यवाद .
Comment by MAHIMA SHREE on August 28, 2014 at 9:25pm

बहुत ही सकरात्मक कथा ..हार्दिक बधाई आपको सादर 

Comment by Shubhranshu Pandey on August 28, 2014 at 6:35pm

आदरणीय डा विजय शंकर जी,

 ग्लास के आधा भरे और आधा खाली होने के उदाहरण हम आसानी से देते हैं लकिन उसे मूर्त रुप से बताना कठिन होता है और हम वास्तविकता में ग्लास के खाली वाले भाग  को ही पकड़ कर रह जाते हैं.

बहु ने ग्लास के उसी खाली भाग को पकडा है और  सास ने ग्लास के भरे भाग को आगे कर के एक सुन्दर उदाहरण दिया है. 

सादर.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 28, 2014 at 1:15pm

आदरणीय डॉ साब ..आपने बिलकुल सही कहा है सुख और दुःख तो प्राकृतिक हैं हमें कोशिस करना है की हम जितना खुश रह सकें रहे ..सार्थक सन्देश देती इस रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
10 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service