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अदाओं से उसका लुभाना गया - ग़ज़ल ( लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’ )

2122    1221     2212

************************
नीर पनघट  से  भरना, बहाना गया
चाहतों का वो दिलकश जमाना गया

***
दूरियाँ  तो  पटी  यार  तकनीक  से
पर अदाओं से उसका लुभाना गया

***
पेड़  आँगन  से  जब  दूर  होते गये
सावनों  का  वो मौसम सुहाना गया

***
आ  गये  क्यों  लटों  को बिखेरे हुए
आँसुओं  का  हमारे  ठिकाना  गया

***
नाम  उससे  हमारा  गली  गाँव  में
साथ  जिसके हमारा  जमाना  गया

***
गंद शहरी जो गिरने लगी रोज अब
झील  के  तट  परिंदों  नहाना गया

***
 ( रचना - 11 दिसम्बर 2011  )
मौलिक और अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

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Comment

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Comment by Shyam Narain Verma on August 23, 2014 at 4:11pm
" सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई   "
Comment by Meena Pathak on August 23, 2014 at 2:06pm

बहुत सुन्दर गज़ल हुई आ० धामी भाई | सादर बधाई

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 23, 2014 at 12:56pm
पेड़ आँगन से जब दूर होते गये
सावनों का वो मौसम सुहाना गया ॥
बहुत सुन्दर आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , बधाई .
Comment by Pawan Kumar on August 23, 2014 at 12:50pm

पेड़ आँगन से जब दूर होते गये
सावनों का वो मौसम सुहाना गया

बहुत ही सुन्दर पंक्ति ... मन को झकझोरते भाव।
अगर हम अभी भी उतना ही ध्यान देते तो सावन का मौसम हमेशा सुहाना रहता।
प्रस्तुति के लिए बधाई ....

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 23, 2014 at 12:22pm

धामी जी

बहुत सुन्दर

 

नाम उससे हमारा गली गाँव में ------  वाह - वाह

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