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ग़ज़ल - गिरिराज भंडारी - - कभी झेली भी है शर्मिन्दगी क्या

कभी  झेली  भी है शर्मिन्दगी क्या

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 1222      1222       122

कभी खुद से शिकायत भी हुई क्या

कभी  झेली  भी है शर्मिन्दगी क्या

 

बहुत  बाहोश खोजे , मिल न पाये

मिला  देगी  हमें अब  बेखुदी क्या

 

ये क़िस्सा,  दर्द- आँसू  से बना है

समझ  लेगी  इसे आवारगी  क्या

 

अगर सीने में सादा दिल है ज़िन्दा

बनावट  बाहरी क्या, सादगी  क्या

 

ख़ुदा वालों  ख़ुदा  कहने से  पहले

ज़रा सा जान तो लो, है खुदी क्या

 

हमें तो  पेट ने  कर डाला  बेसुघ

हमारी  क़ाफिरी  क्या, बंदगी क्या

 

अमीरी , ज़िंदगी  जीती  हो शायद

हमारी  मौत क्या है ज़िंदगी  क्या

 *******************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित 

 

 

 

 

Views: 816

Comment

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Comment by Asif Amaan on August 8, 2014 at 10:54am

मोहतरम गिरिराज भंडारी साहब उम्दा कलाम के लिये बेहद मुबारकबाद!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 8, 2014 at 8:11am

आदरनीय आशुतोष भाई , आपकी सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 8, 2014 at 8:10am

आदरणीय जितेन्द्र भाई , आपका आभारी हूँ ॥

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 7, 2014 at 6:53pm

आदरणीय भाईसाब ..बहुत ही उम्दा ग़ज़ल है हर शेर काबिले तारीफ ..इन दो शेरो पर मेरी तरफ से बिशेष रूप से बधाई स्वीकार करें अगर सीने में सादा दिल है ज़िन्दा
बनावट बाहरी क्या, सादगी क्या
अमीरी , ज़िंदगी जीती हो शायद
हमारी मौत क्या है ज़िंदगी क्या...हार्दिक बधाई के साथ सादर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 12:58am

बहुत बेहतरीन गजल, आदरणीय गिरिराज जी. आपको दिली बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2014 at 9:22pm

बहुत बहुत शुक्रिया , आदरणीया राजेश जी , आपकी इस मुक्त प्रशंशा ने मेरी हिम्मत बढ़ा दी है ॥ स्नेह बनाये रखियेगा ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 6, 2014 at 8:18pm

ख़ुदा वालों  ख़ुदा  कहने से  पहले

ज़रा सा जान तो लो, है खुदी क्या-----लाजबाब 

 

हमें तो  पेट ने  कर डाला  बेसुघ

हमारी  क़ाफिरी  क्या, बंदगी क्या----उम्दा शेर 

 

अमीरी , ज़िंदगी  जीती  हो शायद

हमारी  मौत क्या है ज़िंदगी  क्या----दिल छू गया ये शेर तो 

बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है आ० गिरिराज जी बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2014 at 8:29am

आदरणीय आमोद भाई , हौसला अफज़ाई के लिये  तहे दिल से  शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2014 at 8:27am

आ. बड़े भाई गोपाल जी , आपका आशीर्वाद मिला तो ग़ज़ल कहना सार्थक हो गया ॥ स्नेहिल सराहना के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2014 at 8:26am

आदरणीय सौरभ भाई , गज़ल पर आपकी उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥

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