For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुरेश रात-दिन कितनी भी शरीर-तोड़ मेहनत कर ले, अपनी पत्नि रजनी और दोनों बच्चों के खर्च के साथ-साथ मोबाईल, मोटर-साइकिल,मकान का किराया सब कुछ वहन नहीं कर सकता. अब पेट काटकर धीरे-धीरे अपना घर बनाना शुरू तो कर दिया पर कभी सीमेंट ख़त्म, तो कभी लोहा.

लेकिन.. जब से सुरेश से कहीं ज्यादा कमाने वाले मित्र, अशोक का उसके यहाँ आना-जाना शुरू हुआ है, तब से घर का काम दिन दोगुना -रात चौगुना चल रहा है. आजकल तो सुरेश अपने घर के बंद दरवाजे के बाहर अशोक के जूतों को देख, अपने नए बन रहे घर कि ओर चला जाता है..

     

जितेन्द्र 'गीत'

(मौलिक व् अप्रकाशित)  

Views: 852

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 10:13am

जी आदरणीय सौरभ जी. आपका पुन: आभारी हूँ

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 7, 2014 at 10:09am

//लेखन के प्रति आपकी संतुष्टि व् स्नेहभरी प्रतिक्रिया का यह रूप मैं अभी तक नही देख पाया था, //

पहले कैसे देख पाते आप, जबकि आपने लिखना ही अब शुरु किया है !!

 

पुनः, आप पर अब महती दायित्व है, भाई जितेन्द्रजी.

भाई लोग लखनकर्म के दौर में आये इन्हीं मोड़ों से बहकने लगते हैं. सो, देखियेगा ! अनावश्यक स्माइलियों के साथ नहीं, चैतन्य गंभीरता के साथ.

शुभ-शुभ

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 10:02am

आपकी प्रतिक्रिया हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीय विजय मिश्र जी. आपके विचारों से सहमत हूँ, विषय ओछा ही है किन्तु सत्य है

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 9:46am

रचना पर आपके आशीर्वाद से रचना धन्य हुई आदरणीय लक्ष्मण जी. आप बिलकुल सही कह रहे हैं आजकल खोखली वाहवाही के सिवाय कुछ भी नही है

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 9:35am

आदरणीय सौरभ जी. लेखन के प्रति आपकी संतुष्टि व् स्नेहभरी प्रतिक्रिया का यह रूप मैं अभी तक नही देख पाया था, अत: प्रतिउत्तर में.... :-))

आपके मार्गदर्शन से हमेशा मुझे कथ्य व् शिल्प में सुधार और कसावट बरकरार रखने को प्रेरित किया है, और यह सब कुछ आप सभी  सुधिजनो के मार्गदर्शन व् सुझाव से मिला है.

आपका ह्रदय से आभारी हूँ, आपकी शुभकामनाये शिरोधार्य है सर

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 9:15am

आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हमेशा मुझे मनोबल प्रदान करती है आदरणीय गिरिराज जी, आपका ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 9:14am

आपकी शुभकामनाएं सर आँखों पर, आदरणीय रवि जी. आपके स्नेह,मार्गदर्शन के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 7, 2014 at 9:12am

यहाँ सुकून की कोई परवाह नही है, बस सफलता मिलनी चाहिए. रचना पर आपकी उपस्थिति हेतु आपका आभारी हूँ

सादर!

Comment by विजय मिश्र on August 5, 2014 at 1:34pm
विषय ओछा है और इसका सन्देश समाजिक दृष्टि से अमान्य है कचोट भर हमारा उदेश्य न हो | सत्य भी है तो पसारने नहीं ,नकारने योग्य है |बधाई गीतजी
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 5, 2014 at 12:04pm

ऐसे संस्कारों में पले लोग मेरे हिसाब से दया के ही पात्र है | हमारा सामाजिक दायित्व कुछ नहीं रह गया लगता है जो इस 

भौतिक वादी सोच से और दयनीय होते जा रहे अपने ही समाज को परिवारों की स्थिति की ओर आँख मूंदे हुए है और 

सामाजिक मंचो पर तथाकथित वाहवाही लूटते रहते है | साथ ही अशोक जैसे मित्र को देखिये | मित्रता कैसी ? और क्यों ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
yesterday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service