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ग़ज़ल - कभी दोश अश्कों से तर रहा ( गिरिराज भंडारी )

11212     11212      11212       11212  

न तो आँधियाँ ही डरा सकीं , न ही ज़लजलों का वो डर रहा

तेरे नाम का लिये आसरा , सभी मुश्किलों से गुजर रहा

 

न तो एक सा रहा वक़्त ही , न ही एक सी रही क़िस्मतें

कभी कहकहे मिले राह में , कभी दोश अश्कों से तर रहा

 

कोई अर्श पे जिये शान से , कहीं फर्श भी न नसीब हो 

कहीं फूल फूल हैं पाँव में , कोई आग से है गुज़र रहा

 

तेरी ज़िन्दगी मेरी ज़िन्दगी , हुआ मौत से जहाँ सामना

हुआ हासिलों का शुमार जब , ये सिफर हुआ वो सिफर रहा

 

कभी था यक़ीन भी छाँव पर , कभी धूप भी थी खिली हुई

हुई बदलियों में वो साजिशें , न वो आफताब न घर रहा

 

ऐ खुदा तेरे तो जहान की , है हक़ीकतें भी अजब गज़ब

कोई खाया इतना कि मर गया, कोई खा सका न तो मर रहा 

 

गिरी बिजलियाँ यहाँ इस क़दर ,जला ख़्वाब का मेरा आशियाँ

बड़ा अब सुकून हुआ मुझे , न वो घर रहा न वो डर रहा

           *******************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित ( संशोधित )

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 25, 2014 at 11:40am

आदरणीय शिज्जु भाई , सारी आसानियाँ इसी मंच के देन है , इस मंच का और आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 25, 2014 at 11:38am

आदरणीय निलेश भाई , आपकी उत्साह वर्धन करती  प्रतिक्रिया के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 25, 2014 at 11:36am

आदरणीय बड़े भाई , ग़ज़ल को आपका आशीर्वाद मिला , सराहना मिली तो ग़ज़ल कहना सफल हुआ ॥ आपका हृदय से आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 25, 2014 at 11:30am

बहुत खूब सर इस मुश्किल बह्र पर भी आप बड़ी आसानी से अपनी बात कह लेते हैं बहु बहुत बधाई इस ग़ज़ल के लिये

Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 25, 2014 at 11:16am

बहुत सुन्दर ग़ज़ल ... दिल लूटने वाली और गाने वालों कि सबसे पसंदीदा और मुश्किल बह्र पर ग़ज़ल कहने के लिए विशेष बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 25, 2014 at 10:58am

आ------हा------

मित्र

क्या चुन चुन के गजल कही है i कलम हो तो ऐसी  !  मै  निशब्द हूँ प्रिय  i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 24, 2014 at 9:46pm

आदरणीया कल्पना जी , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by kalpna mishra bajpai on July 24, 2014 at 9:04pm

सर आप बहुत अच्छी गजल लिखते हैं बहुत बधाई आपको /सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 24, 2014 at 8:49pm

आदरणीय गणेश बागी भाई जी , आपकी सलाह सर आखों पर , सीखने की प्रक्रिया जीवन भर चलाती रहती है , मै ज़रूर आपकी सलाह के अनुसार आगे प्रयत्न करूंगा । रचना को समय देने के लिये और सराहना के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 24, 2014 at 8:46pm

आदरणीय विजय शंकर भी , ग़ज़ल पर आपकी उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिये आपका दिल से आभारी हूँ ॥

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