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लघुकथा-थप्पड़/कल्पना रामानी

अपने बच्चों को सिंकते हुए भुट्टे और बिकते हुए जामुनों  को ललचाई नज़रों से देखते हुए वो मन मसोस कर रह जाती थी। आज उसे तनख़्वाह मिली थी, उसके हाथों में पोटली देख कोने में खेलते हुए दोनों बच्चे खिलौने छोड़ दौड़ पड़े। तभी बीड़ी पीते हुए पति ने उससे कहा-“ला  पैसे, बहुत दिनों से गला तर नहीं हुआ”... “लेकिन आज मैं बच्चों के लिए...” “तड़ाक!..."  "तो तू मेरे खर्च में कटौती करेगी?” पोटली जमीन पर गिरी, जामुन  और भुट्टे मैली ज़मीन सूँघने लगे और... माँ पर पड़े थप्पड़ से सहमे हुए बच्चे अपना गाल सहलाते हुए पुनः अपने टूटे-फूटे खिलौनों के साथ कोने में दुबक गए।

मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 3, 2014 at 9:51am

पहले तो गरीबी की मार ऊपर से पति बेवडा ...जिसकी नजरों में ममता की कोई कीमत नहीं ,कोई जिम्मेदारी का अहसास नहीं,अपने स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं  ....कैसे घर चले ,कैसे बच्चों की परवरिश हो ?ये एक निम्न, आर्थिक रूप से कमजोर, मजदुर तबके की गंभीर समस्या है| जो आपकी इस लघु कथा में खूब उभर कर आई है|बहुत-बहुत  बधाई  आ०  कल्पना  दी इस सुन्दर सार्थक लघु कथा के लिए | 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 3, 2014 at 8:38am

अक्सर देखा जाता है की घरों में काम वाली बाई की पगार उसका निठल्ला आदमी छीन कर मदिरा पान में उड़ा देता है 

और बच्चे खाने पीने और शिक्षा तक से महरूम रहकर जीवन जीने को बाध्य हो जाते है | ऐसी मार्मिक दशा दर्शाते हुए 

सुंदर लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना रामनानी जी |

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 2, 2014 at 10:17pm

बहुत मर्मस्पर्शी लघुकथा , बधाई आदरणीया कल्पना जी

Comment by savitamishra on July 2, 2014 at 9:11pm

बहुत सुन्दर आदरणीय दीदी 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 2, 2014 at 8:45pm

महनीया

अति सुन्दर  i  वह हकीकत जो हम निर्विकार देखते रहते है i सादर i

Comment by Shubhranshu Pandey on July 2, 2014 at 8:45pm

बहुत सुन्दर कथा अदरणीया...

भुट्टे और जामुन का साथ वास्तविकता के और करीब लाता..

भुट्टा अमुमन बारिश के दिनों में आता है और बेर वसंत के समय बिकने को तैयार होता है...सुधीजन इस पर प्रकाश डाल सकते हैं...

सादर.

Comment by Priyanka singh on July 2, 2014 at 5:01pm

उफ़ ....मार्मिक...बच्चों की निगाहें घूम गयी ...आँखों के सामने .... बहुत अच्छी लघु कथा ....बधाई आपको मैम ...

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