For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बेईमान सारे एक हैं- डा० विजय शंकर

बेईमानी की इतनी विधाएँ हैं
झूठ के रूप अनेक हैं
फिर भी बेईमान सारे एक हैं |
ऐसा भाई-चारा , ऐसा प्रेम ,
शायद ही कहीं किसी कर्म-क्षेत्र
के रखवालों में मिले , दुर्लभ है ।
दूसरी और सच एक है ,
ईमानदारी एक है ,
न सच के दो रूप हो सकते हैं ,
न ईमानदारी के |
फिर भी दो सच्चे ईमानदार
कभी एक नहीं हो सकते हैं
उनका एक होना दुर्लभ है ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 731

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 3, 2016 at 6:05am
वाह! आदरणीय सुश्री कान्ता रॉय जी , जब कोई किसी पुरानी रचना पर पहुँच कर याद कर लेता है तो खुशी कई गुना अधिक होती है , वैसे भी हम लोग जो भी लिखते हैं वह साधारण होते हुए भी सदैव सामयिक और प्रासंगिक ही लगता है क्योंकि यहां बदलता तो सिर्फ आदमी है , बाकी तो सब कुछ वैसा ही रहता है।
रचना पर आपकी उपस्थित एवं उसे मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by kanta roy on June 2, 2016 at 11:03pm

बेईमानी की इतनी विधाएँ हैं
झूठ के रूप अनेक हैं
फिर भी बेईमान सारे एक हैं |
ऐसा भाई-चारा , ऐसा प्रेम ,
शायद ही कहीं किसी कर्म-क्षेत्र
के रखवालों में मिले , दुर्लभ है ।-----सौ टका  सच्ची  बात  कही  है  आपने  ,बढ़िया है ! 

दूसरी और सच एक है ,
ईमानदारी एक है ,
न सच के दो रूप हो सकते हैं ,
न ईमानदारी के |
फिर भी दो सच्चे ईमानदार
कभी एक नहीं हो सकते हैं
उनका एक होना दुर्लभ है---कटु  सत्य है  ये  भी ....शानदार  रचना  है  ये  आपकी  आदरणीय  डॉ विजय शंकर  जी .बधाई  आपको 

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 13, 2014 at 9:39pm
धन्यवाद आदरणीय डॉ o प्राची सिंह जी .

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 10, 2014 at 2:09pm

बेईमानों की अनेकता में एकत्व का होना ... सही है

इस प्रस्तुति के लिए बधाई आ० विजय शंकर जी 

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 4, 2014 at 7:20pm
आदरणीय डॉ ० आशुतोष मिश्रा जी ,
सम्मानित बधाई के लिए धन्यवाद एवं आभार .
Comment by Dr. Vijai Shanker on July 4, 2014 at 7:18pm
आदरणीय जीतेन्द्र जी ,
बधाई के लिए धन्यवाद .आपने गहराई को देखा , आभार .
Comment by Dr. Vijai Shanker on July 4, 2014 at 7:15pm
आदरणीय बृजेश नीरज जी ,
हार्दिक बधाई के लिए धन्यवाद .
Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 3, 2014 at 3:10pm
आदरणीय विजय जी ..आपके चिंतन में अनोखी ताजगी देखी ..इस चिंतन को सलाम सादर
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 1, 2014 at 10:00am

यही बिडम्बना है सारे इमानदार या  सच एक नहीं हो सकते क्युकी शायद उनके भी अपने अलग-अलग पैमाने होते है.  इस प्रस्तुति पर आपको हार्दिक बधाई आदरणीय डा.विजय जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 1, 2014 at 9:52am

आ० विजय भाई भाव अच्छे है , शिल्प में और कसावट की आवश्यकता है , हार्दिक बधाई कबूलें l

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service