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तरही ग़ज़ल //अभिनव अरुण- बारिशों का ख्व़ाब था..

ग़ज़ल -

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन

२१२२ २१२२ २१२२ २१२

 

मौत का आना है तय उससे बचा कोई नहीं |

काम आ पायेगी अब शायद दुआ कोई नहीं |

 

अब बुज़ुर्गों के लिए रोटी दवा दालान में ,

घर के लोगों का अब उनसे वास्ता कोई नहीं |

 

है पते वालों की ख़ातिर आपकी हर योजना ,

वो कहाँ जाएँ कहो जिनका पता कोई नहीं |

 

कौन अब ताउम्र जीता है किसी के वास्ते ,

इश्क़ फरमाते हैं सब पर बावफ़ा कोई नहीं |

 

मुल्क की गठरी नहीं इस रास्ते महफ़ूज़ है ,

राहजन चारों तरफ हैं रहनुमा कोई नहीं |

 

सत्य का परचम लिए तनहा डटा मैदान में ,

मेरे पीछे तो यहाँ अब तक चला कोई नहीं |

 

देखिये मंचों पे उनको पहली सफ़ में बैठते

जिनकी ग़ज़लों में रदीफ़ों काफ़िया कोई नहीं |

 

बंद कमरों की सियासत उनको ले डूबी मियाँ ,

बारिशों का ख्व़ाब था छाई घटा कोई नहीं |

* सर्वथा मौलिक अप्रकाशित .

- अभिनव अरुण .

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on July 7, 2014 at 2:15pm

आपके आशीष पा कर ग़ज़ल धन्य  हुई आदरणीय , सादर प्रणाम !! स्नेह एवं मार्गदर्शन की अपेक्षा सदा रहती है आपसे !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 2:49am

वाह !  इन शेरों पर दाद देने में ’कमाल’ शब्द भी कमतर होगा -

मौत का आना है तय उससे बचा कोई नहीं |

काम आ पायेगी अब शायद दुआ कोई नहीं |

 

अब बुज़ुर्गों के लिए रोटी दवा दालान में ,

घर के लोगों का अब उनसे वास्ता कोई नहीं |

 

है पते वालों की ख़ातिर आपकी हर योजना ,

वो कहाँ जाएँ कहो जिनका पता कोई नहीं |

लेकिन निम्न शेर सामने से क्या गुजरा, मैं बह गया -

बंद कमरों की सियासत उनको ले डूबी मियाँ ,

बारिशों का ख्व़ाब था छाई घटा कोई नहीं | ..

तल्ख़ किन्तु यही सच है !

Comment by Abhinav Arun on June 26, 2014 at 4:48pm
आभार आदरणीय श्री गुमनाम जी !
Comment by gumnaam pithoragarhi on June 26, 2014 at 11:07am

सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई,,,,,,,,,,,,,,,,,,बहुत सुंदर.,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by Abhinav Arun on June 26, 2014 at 8:57am

आदरणीय श्री सुशील जी एवं डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  तहे दिल से आभार आप सबका रचना सार्थक हुई !!

Comment by Abhinav Arun on June 26, 2014 at 8:55am

आदरणीया राजेश कुमारी जी उत्साहवर्धन एवं अनुमोदन के लिए तहे दिल से शुक्रिया आपका !!

Comment by Abhinav Arun on June 26, 2014 at 8:54am

आदरणीया कुंती जी बहुत शुक्रिया बहुत आभार , जी अवश्य साहित्य और सच ही मेरी पटरियां हैं और ज़िन्दगी रेल ...

Comment by Abhinav Arun on June 26, 2014 at 8:53am

आदरणीय श्री नादिर जी हार्दिक रूप से धन्यवाद ये अशार मेरे भी पसंदीदा है ..शुक्रिया !!

Comment by नादिर ख़ान on June 25, 2014 at 11:09pm

है पते वालों की ख़ातिर आपकी हर योजना ,

वो कहाँ जाएँ कहो जिनका पता कोई नहीं |

 

कौन अब ताउम्र जीता है किसी के वास्ते ,

इश्क़ फरमाते हैं सब पर बावफ़ा कोई नहीं |

आदरणीय अभिनव जी शानदार गज़ल के लिए ढेरों शुभकामनायें ....सभी शेर पसंद आए 

Comment by Abhinav Arun on June 25, 2014 at 9:14pm
आ.डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी ह्रदय से आभार आपके आशीष पा धन्य हुआ !!

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