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वज्न ~ 1222 1222 122

शिकायत है, नही कुछ भी जियादा

मुहब्बत है, नही कुछ भी जियादा

.

करे वह वार मुझ पे पीठ पीछे

अदावत है, नही कुछ भी जियादा

.

बदलते रंग क्यों गिरगिट के जैसे

ये आदत  है, नही कुछ भी जियादा

.

अलग हैं कायदे सबके लिए क्यों

सियासत है, नही कुछ भी जियादा

.

कहीं बेजां अमीरी, कोई फाके

खिलाफत है, नही कुछ भी जियादा

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 822

Comment

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Comment by वेदिका on July 8, 2014 at 9:56am

आभार आदरणीय सौरभ जी!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 1:26am

वाह वाह !

जो हुआ है वो बहुत जियादा है.. बधाई स्वीकारें.. .

:-))

Comment by वेदिका on July 2, 2014 at 10:51am
आभार आदरणीया प्राची दी!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 30, 2014 at 7:26pm

खूबसूरत प्रस्तुति प्रिय गीतिका जी 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by वेदिका on June 28, 2014 at 7:41pm

रचना को स्नेह देने हेतु हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ,

आ० गोपाल जी!, आ० अभिनव जी! आ० महिमा जी!, आ० मीना दीदी!, आ० शिज्जु जी! आ० गिरिराज जी!, आ० लक्ष्मण जी!, आ० विजय जी!, आ० विजय शंकर जी!

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 24, 2014 at 12:13am
अलग हैं कायदे सबके लिए क्यों
सियासत है, नही कुछ भी जियादा
बहुत सुन्दर , आ o गीतिका वेदिका जी , बधाई .
Comment by विजय मिश्र on June 23, 2014 at 12:52pm
बहुत प्यारी सी गजल ,साधुवाद वेदिकाजी
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 23, 2014 at 11:22am

वाह क्या खूब ग़ज़ल है आ० गीतिका जी -
शिकायत है, नही कुछ भी जियादा
मुहब्बत है, नही कुछ भी जियादा

हार्दिक बधाई कबूल करें .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 23, 2014 at 10:33am

आदरनीय गीतिका  जी , कठिन और लम्बे रदीफ का आपने बहुत अच्छे से निर्वाह किया । अच्छी ग़ज़ल के लिये आपको बधाई ।

शिज्जू भाई से सहमत हूँ , मिलावट काफिया ग़लत है यहाँ पर , सुधार लीजियेगा ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 23, 2014 at 9:01am

वाह क्या खूब ग़ज़ल है
शिकायत है, नही कुछ भी जियादा
मुहब्बत है, नही कुछ भी जियादा
.
करे वह वार मुझ पे पीठ पीछे
अदावत है, नही कुछ भी जियादा

कुछ न कह के भी बहुत कुछ कह दिया दिली दाद कुबूल फरमायें।

इस ग़ज़ल में 'मिलावट' काफिया सही नहीं होगा।

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