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2122 1212 22/112

मुल्क़ में किस्सा इक नया तो हो

अब अज़ीयत की इंतिहा तो हो                अज़ीयत =यातना

 

ग़म से किसको मिली नजात यहाँ

मर्ज़ कहते हो फिर दवा तो हो

 

जी उठेगा फिर अपनी राख से पर

वो मुकम्मल अभी जला तो हो

 

दीनो-ईमाँ की बात करते हैं

हो हरम दिल में बुतकदा तो हो                      हरम =मस्जिद,  बुतकदा =मंदिर

 

ज़ह्र अपनी ज़बान से छूकर

कह रहे हैं कि तज़्रिबा तो हो

 

रुख़ हवा का बदल गया है “शकूर”

किस तरफ चलना है पता तो हो  

 

- मौलिक व अप्रकाशित

 

 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 17, 2014 at 9:27pm

आदरणीया मंजरी जी आपका तहेदिल से शुक्रिया

Comment by mrs manjari pandey on June 15, 2014 at 9:44pm
आदरणीय शिज्जू शकूर जी . बहुत बहुत बधाइयाँ बहुत ही सुन्दर रचना के लिए

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 11, 2014 at 7:54am

आदरणीय सुरेन्द्र सर रचना की सराहना द्वारा उत्साहवर्धन के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 11, 2014 at 7:53am

आदरणीय सौरभ सर रचना पर विस्तृत टिप्पणी से उत्साह काफी बढ़ा आपका तहे दिल से शुक्रिया कि आपने मेरी रचना को मान दिया मेरा उत्साहवर्धन किया :-)

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 9, 2014 at 9:49pm

दीनो-ईमाँ की बात करते हैं

हो हरम दिल में बुतकदा तो हो  

रुख़ हवा का बदल गया है “शकूर”

किस तरफ चलना है पता तो हो  

बहुत सुन्दर गजल शुकूर जी दाद कुबूल करें
भमर ५


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 9, 2014 at 6:33pm

अब क्या कहूँ, जब सबकुछ शानदार बन कर सामने आये ! क्या ग़ज़ल हुई है साहब ! .. कमाल !
कौन होगा जो इन शेरों पर झूम न जाये -

जी उठेगा फिर अपनी राख से पर
वो मुकम्मल अभी जला तो हो

ज़ह्र अपनी ज़बान से छूकर
कह रहे हैं कि तज़्रिबा तो हो

लेकिन, जिस शेर में आपकी अहम मौज़ूदग़ी है, जो आपके कहे में विशेष सुगंध जीता है, वो इस ग़ज़ल का मतला है -   
रुख़ हवा का बदल गया है “शकूर”
किस तरफ चलना है पता तो हो  ... . वाह वाह वाह ! वाह भाई वाह !

अब क्या कहूँ कि इस ग़ज़ल पर दाद लीजिये ?!

ये तो खुद ही बनता है भाई. .. :-)))


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 9, 2014 at 3:48pm

आदरणीय वीनस जी रचना की सराहना के लिये आपका तहेदिल से शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 9, 2014 at 3:47pm

आदरणीय उमेश जी आपका तहे दिल से शुक्रिया

Comment by वीनस केसरी on June 9, 2014 at 4:22am

वाह बेहतरीन ग़ज़ल है

Comment by umesh katara on June 8, 2014 at 8:12am

वाहहहहहहह बहुत उम्दा गजल कही है सर 

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