For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कितने ही लोगों से हमने हाथ मिलाये

२१२२    २१२२     २११२२

 

कितने ही लोगों से हमने हाथ मिलाये

गम में डूबे जब भी कोई काम न आये

 

दिल तन्हा ये रो के अपनी बात बताये  

कैसे उल्फत हाय तन में आग लगाये

 

तोहफे में दे सका जो गुल भी न हमको

आज वही फूलों से मेरी लाश सजाये

 

जिनके दिल में गैरों की तस्वीर लगी है

करके गलबहिया वो सर सीने में छुपाये

 

दिल की बातें दिल ही जब समझे न यहाँ पर

क्यूँ  तन्हा फिर भीड़ में दिल खुद को न पाये

 

वो भी मिलता हमसे अंजानो कि तरह ही

जिसने बालू पर थे घर भी साथ बनाये

 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 712

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 19, 2014 at 10:24pm

वाह! आदरणीय डा. आशुतोष जी, बहुत ही खुबसूरत गजल कही आपने. दिली बधाई स्वीकारिये

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 19, 2014 at 4:25pm

आदरणीय अखिलेश भाईसाब ..बिलकुल सही मशविर दिया है .बहर में गलती हो गयी है मैं इसे संसोधित कर रहा हूँ ..मशविरे और उत्साह वर्धन के लिए तहे दिल धन्यवाद  सादर 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 19, 2014 at 1:40pm

आदरणीय आशुतोष भाई

खूबसूरत गज़ल की बधाई 

बहर का मुझे ज्ञान नहीं लेकिन प्रवाह और लय इसमें है ............

फूलों से वही आज मेरी लाश सजाये

सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 19, 2014 at 1:08pm

आदरणीय लक्ष्मण जी आपके स्नेहिल शब्दों के लिए तहे दिल आभार व्यक्त करता हूँ ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 19, 2014 at 1:05pm

आदरणीय कँवर जी .. मेरी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपको तहे दिल धन्यवाद ..बस यूं ही आपका स्नेहस सदा मिलता रहे ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 19, 2014 at 1:03pm

आदरणीय सुरेंदा जी ..हौसला अफजाई के लिए तहे दिल धन्यवाद  सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 19, 2014 at 11:57am

शकील  भाई जी ..आपके स्नेहल शब्दों के लिए तहे दिल धन्यवाद ..सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 19, 2014 at 10:47am

आदरणीय आशतोष भाई जीतनी भी प्रशंसा करें वह कम कम है ... हार्दिक बधाई .

Comment by कंवर करतार on May 18, 2014 at 10:49pm

डॉ मिश्रा जी, जज्बातों को खूब पिरोया है -मरहबा मरहबा I

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 18, 2014 at 12:17pm

दिल की बातें दिल ही जब समझे न यहाँ पर

क्यूँ  तन्हा फिर भीड़ में दिल खुद को न पाये

सुन्दर जज्बात और इस जमाने से मिलते पुरस्कार डॉ आशुतोष जी बधाई
भ्रमर ५

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
22 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
23 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
23 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
23 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
23 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
23 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service