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मन – पाँच दोहे

************

मन को मत कमजोर कर , फिर से होगी भोर

फिर से गुनगुन धूप में , नाचेगा मन मोर 

 

मन, आखें मीचे अगर , खूब मचाये शोर

आँख अगर हो  देखती , मन भटके चहुँ ओर

 

खाली मन चिंता करे , मन का बस ये काम

बांधो इसको काम से , कभी न दो आराम

 

मन का ले के साथ तू , मन से हो जा दूर

मन के बन्धन में रहा , वो लगता मज़बूर

 

जब तक मन का राज है, मन मनवाये बात   

तू राजा जिस दिन हुआ , मन की क्या औकात    

 

मौलिक एवँ अप्रकाशित  ( संशोधित )

***********************************

 

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2014 at 8:48pm

आदरणीय अन्नपूरणा जी , दोहों की सराहना के लुये आपका शुक्रिया ॥

Comment by annapurna bajpai on February 13, 2014 at 8:12pm

बहुत सुंदर दोहे , बधाई आपको । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2014 at 5:38pm

आदरणीया मीना जी , दोहों की सराहना के लिये आपका बहुत शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2014 at 5:36pm

आदरणीय बड़े भाई विजय भाई , दोहो की सराहना के लिये आपका बहुत आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2014 at 5:35pm

आदरणीय नादिर खान भाई , दोहों की सराहना के लिये आपका बहुत आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2014 at 5:34pm

आदरणीय जितेन्द्र भाई , दोहों की सराहना के लिये आपका आभार ॥

Comment by Meena Pathak on February 13, 2014 at 4:31pm

बहुत सुन्दर दोहे आदरणीय गिरिराज जी | सादर बधाई 

Comment by vijay nikore on February 13, 2014 at 12:04pm

इन सुन्दर दोहों के लिए बधाई, आदरणीय गिरिराज भाई।

Comment by नादिर ख़ान on February 13, 2014 at 12:06am

मन को मत कमजोर कर , फिर से होगी भोर

फिर से गुनगुन धूप में , मन नाचेगा मोर ..आदरणीय गिरिराज जी, सुंदर दोहे ... मन को भाये.... 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 12, 2014 at 11:54pm

खाली मन चिंता करे , मन का बस ये काम

बांधो इसको काम से , कभी न दो आराम

 मन का ले के साथ तू , मन से हो जा दूर

मन के बन्धन में रहा , वो लगता मज़बूर

सटीक संदेशप्रद दोहावली आदरणीय गिरिराज जी, हार्दिक बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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