For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - छीन लेगा मेरा .गुमान भी क्या

छीन लेगा मेरा .गुमान भी क्या
इल्म लेगा ये इम्तेहान भी क्या

ख़ुद से कर देगा बदगुमान भी क्या 
कोई ठहरेगा मेह्रबान भी क्या

है मुकद्दर में कुछ उड़ान भी क्या
इस ज़मीं पर है आसमान भी क्या

मेरा लहजा ज़रा सा तल्ख़ जो है

काट ली जायेगी ज़बान भी क्या

धूप से लुट चुके मुसाफ़िर को

लूट लेंगे ये सायबान भी क्या

इस क़दर जीतने की बेचैनी
दाँव पर लग चुकी है जान भी क्या

अब के दावा जो है मुहब्बत का
झूठ ठहरेगा ये बयान भी क्या

मेरी नज़रें तो पर्वतों पर हैं
मुझको ललचायेंगी ढलान भी क्या

- वीनस केसरी
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 987

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by भुवन निस्तेज on March 25, 2014 at 11:50pm

मेरा लहजा ज़रा सा तल्ख़ जो है

काट ली जायेगी ज़बान भी क्या

 

वाह! बेहतरीन ..........

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 5, 2014 at 9:42am

अब के दावा जो है मुहब्बत का
झूठ ठहरेगा ये बयान भी क्या...............बहुत खूब...................

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on February 2, 2014 at 6:53pm

अयहयहयहय..क्या बात कही है..गजल इसे कहते हैं...वाह..

Comment by Maheshwari Kaneri on January 31, 2014 at 10:25pm

आदरणीय वीनस जी शानदार ग़ज़ल कही है, बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Saarthi Baidyanath on January 30, 2014 at 11:53am

जिंदाबाद ग़ज़ल ! क्या शानदार ग़ज़ल कही है आदरणीय ...हर शेर , सवाल कर रहा है खुलुसियत के साथ ...माशा-अल्लाह ! मेरे पसंदीदा अशआर ..
छीन लेगा मेरा .गुमान भी क्या 
इल्म लेगा ये इम्तेहान भी क्या ..उम्दा आगाज़ 

है मुकद्दर में कुछ उड़ान भी क्या 
इस ज़मीं पर है आसमान भी क्या

मेरा लहजा ज़रा सा तल्ख़ जो है

काट ली जायेगी ज़बान भी क्या

धूप से लुट चुके मुसाफ़िर को

लूट लेंगे ये सायबान भी क्या ..... मजा आ गया ..धूप सा मजा आ गया सर्दियों में !..वाह साहब वाह 

Comment by Abhinav Arun on January 30, 2014 at 11:44am
मेरी नज़रें तो पर्वतों पर हैं
मुझको ललचायेंगी ढलान भी क्या....लाजवाब आपके मेयार की जिंदाबाद ग़ज़ल आदरणीय ...हौसला देते हैं आपके बेलाग बयान ,,साधुवाद !!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 30, 2014 at 11:33am

इस क़दर जीतने की बेचैनी
दाँव पर लग चुकी है जान भी क्या.. .  इस शेर को देर तक मथता रहा. ’बचे कुछ दिन’ वालों की याद कर मन वाकई सिहर गया.

आप तकाबुले रदीफ़ क्यों रहने देते हैं जी ?


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 28, 2014 at 8:50pm

है मुकद्दर में कुछ उड़ान भी क्या 
इस ज़मीं पर है आसमान भी क्या----वाह्ह्ह्हह वाह्ह्ह 

मेरी नज़रें तो पर्वतों पर हैं 
मुझको ललचायेंगी ढलान भी क्या ---जबरदस्त ,लाजबाब 

ग़ज़ल पर देर से पंहुची इसका खेद है ,पर मजा आ गया पढ़ के सभी शेर लाजबाब हैं पर ये दो तो बार बार पढने को मन करता है ,दिल बधाई कबूलें वीनस जी 

Comment by Tilak Raj Kapoor on January 27, 2014 at 10:58pm

वाह-वाह क्‍या बात है।

उम्‍दा ग़ज़ल। 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 26, 2014 at 1:27pm

है मुकद्दर में कुछ उड़ान भी क्या 
इस ज़मीं पर है आसमान भी क्या

इस क़दर जीतने की बेचैनी 
दाँव पर लग चुकी है जान भी क्या 

मेरी नज़रें तो पर्वतों पर हैं 
मुझको ललचायेंगी ढलान भी क्या ..आदरणीय वीनस सर ..आपकी इस बेहतरीन ग़ज़ल को पढ़कर हमेशा की तरह ही नयी सोच मिली है उधृत किया शेर मुझे बिशेस रूप से पसंद आये ..आपको हार्दिक बधाई केसाथ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Mar 10
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Mar 10

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Mar 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service