For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुन्दर दृश्य उत्पन्न करती हैं

एक साथ जलती ढेरों मोमबत्तियाँ

 

भीड़ से घिरी उनकी रोशनी

कसमसाकर दम तोड़ देती है

 

वातावरण में घुले नारे

खंडहर में पैदा हुई अनुगूँज की तरह

कम्पन पैदा करते हैं

 

सर्द हवाएँ

काँटों की तरह चुभती हैं

 

अँधेरा गहराता जा रहा है 

___

बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 932

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on January 7, 2014 at 10:11pm

आदरणीय  अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, आदरणीय  शिज्जु शकूर जी, आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on January 7, 2014 at 10:10pm

आदरणीया महिमा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on January 7, 2014 at 10:09pm

आदरणीय अजय शर्मा जी आपका हार्दिक आभार! अपना आशीष यूँ ही बनाये रखियेगा!

Comment by बृजेश नीरज on January 7, 2014 at 10:08pm

आदरणीया कुंती जी आपका हार्दिक आभार!

कविताई आपकी किताब पढ़कर ही सीख रहा हूँ! आपकी जितनी किताबें पढनें को मिलती रहेंगी, मैं भी सीख-सीखकर लिखता रहूँगा! आपकी अगली किताब की प्रतीक्षा है!

सादर!

Comment by बृजेश नीरज on January 7, 2014 at 10:04pm

आदरणीय Shyam Narain Verma जी, गिरिराज भंडारी जी, Dr Ashutosh Mishra जी, आप सभी का हार्दिक आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on January 7, 2014 at 9:49pm

प्रतीकों में विरोध को रेखांकित करने का यह हुनर कहाँ से सीखा भाई................बेहतरीन..................बधाइयाँ.....................


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 7, 2014 at 9:21pm

आदरणीय बृजेश जी आपने संक्षेप में लेकिन माहौल का सटीक वर्णन किया है बेहतरीन रचना बधाई स्वीकार करें

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 7, 2014 at 7:37pm

सुंदर रचना की बधाई बृजेश भाई॥ आजकल लाइव टेलीकास्ट होने से भी आंदोलन , विरोध प्रदर्शन  करने वालों में  एक  नया जोश भर जाता  है , कुछ देर के लिए ही सही ॥  

Comment by MAHIMA SHREE on January 7, 2014 at 7:30pm

एक अलग वातावरण में ले जाती रचना जहाँ सच की रौशनी तीव्र तो  होती है पर  कभी भी क्षीण होकर बुझ सकती है .... आदरणीय ब्रिजेश जी ... हार्दिक  बधाई आपको ...

Comment by ajay sharma on January 7, 2014 at 7:19pm

.......................................एक साथ जलती ढेरों मोमबत्तियाँ

 aur  fir .......................................अँधेरा गहराता जा रहा है  ...wah kya khoobsoorat virodhabhasi isthiti prastut ki hai ........shreshtha.............bahut bahut shubkamnayen  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service