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अनंग शॆखर छन्द =
===============
कभी डरॆ नहीं कभी मरॆ नहीं सपूत वॊ, प्रचंड  वृष्टि बर्फ और ताप मॆं खड़ॆ रहॆ ॥

हिमाद्रि-तुंग बैठ शीत संग तंग हाल मॆं, सपूत एकता अखण्डता लियॆ अड़ॆ रहॆ ॥
प्रहार रॊज झॆलतॆ अशांति कॆ कुचाल कॆ, सदा निशंक काल-भाल वक्ष पै चढ़ॆ रहॆ ॥
अखंड भारती सुहासिनीं सुभाषिणीं कहॆ, सभी अघॊष युद्ध वीर शान सॆ लड़ॆ रहॆ ॥

 

 
कवि-"राज बुन्दॆली"

17/12/2013

पूर्णत: मौलिक एवं अप्रकाशित रचना,,,,

Views: 3513

Comment

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Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 4, 2014 at 3:20pm

Dr.Prachi Singh जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका,,,,,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 4, 2014 at 3:17pm
Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 4, 2014 at 3:15pm

आदरणीय,,,,, Sanjay Mishra 'Habib' ,,जी,,,,आपने अपना स्नेह दिया दिल से शुक्रगुज़ार  हूं आपका,,,,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 4, 2014 at 3:14pm

आदरणीय,,,,,डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव ,,जी,,,,आपने अपना स्नेह दिया दिल से आभारी हूं आपका,,,,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 4, 2014 at 3:12pm

आदरणीय,,,,Saurabh Pandey,,,,,,जी,,,,आपके इस स्नेह कॊ,,,,,,नमन ,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 3, 2014 at 8:27pm
Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 3, 2014 at 8:26pm

भाई,,,,,अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी इस स्नेह हेतु,,आपका ,,,बहुत बहुत आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 20, 2013 at 12:45pm

देश के वीर सैनिकों को समर्पित बहुत शानदार ऊर्जस्वी रचना 

हार्दिक बधाई आ० राज बुन्देली जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 3:34am

मुग्ध मुग्ध मुग्ध .. .. :-)))

बधाई भाईजी..

सादर

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on December 18, 2013 at 6:18pm

बहुत सुन्दर... जोश भरती छंद रचना...

आदरणीय डा गोपाल नारायण जी से सहमत...

सादर बधाई स्वीकारें आ राज बुंदेली जी..

कृपया ध्यान दे...

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