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भोर का तारा छिपा जाने किधर है //गज़ल //कल्पना रामानी

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आज खबरों में जहाँ जाती नज़र है।

रक्त में डूबी हुई, होती खबर है।

 

फिर रहा है दिन उजाले को छिपाकर,

रात पूनम पर अमावस की मुहर है।

 

ढूँढते हैं दीप लेकर लोग उसको,

भोर का तारा छिपा जाने किधर है।  

 

डर रहे हैं रास्ते मंज़िल दिखाते,

मंज़िलों पर खौफ का दिखता कहर है।

 

खो चुके हैं नद-नदी रफ्तार अपनी,

साहिलों की ओट छिपती हर लहर है।

 

हसरतों के फूल चुनता मन का माली,

नफरतों के शूल बुनती  सेज पर है। 

 

आज मेरा देश क्यों भयभीत इतना,

हर गली सुनसान, सहमा हर शहर है।

मौलिक व अप्रकाशित

कल्पना रामानी

Views: 839

Comment

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Comment by कल्पना रामानी on December 19, 2013 at 9:45pm

आदरणीय सौरभ जी सादर धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 18, 2013 at 8:27pm

आदरणीया कल्पनाजी, अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई.

इस शेर पर विशेष बधाई प्रेषित है -

ढूँढते हैं दीप लेकर लोग उसको,

भोर का तारा छिपा जाने किधर है। 

सादर

Comment by कल्पना रामानी on December 17, 2013 at 10:43pm

अदरणीय नीरज कुमार जी, हृदय से धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on December 17, 2013 at 10:42pm

आदरणीय आशुतोष जी सादर धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on December 17, 2013 at 10:41pm

आदरणीय विजय जी, हार्दिक आभार आपका

Comment by कल्पना रामानी on December 17, 2013 at 10:40pm

आदरणीय वंदना जी, रचना को सराहने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Comment by vijay nikore on December 16, 2013 at 3:53am

//

आज खबरों में जहाँ जाती नज़र है।

रक्त में डूबी हुई, होती खबर है।

 

फिर रहा है दिन उजाले को छिपाकर,

रात पूनम पर अमावस की मुहर है।//

 

इस खूबसूरत गज़ल के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीया।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 9, 2013 at 2:14pm

बेहतरीन ग़ज़ल ..हर अशार जानदार ..वर्तमान परिदृश्य का शानदार शब्द चित्र ..आपको ढेरों बधाई आदरणीया 

Comment by Neeraj Neer on December 9, 2013 at 9:27am

आज मेरा देश क्यों भयभीत इतना,

हर गली सुनसान, सहमा हर शहर है।.. बहुत खूब .. 

सुन्दर ग़ज़ल आदरणीया ..

Comment by vandana on December 9, 2013 at 8:04am

फिर रहा है दिन उजाले को छिपाकर,

रात पूनम पर अमावस की मुहर है।

 

ढूँढते हैं दीप लेकर लोग उसको,

भोर का तारा छिपा जाने किधर है।  

आभार आदरणीया कल्पना मैम इतनी खूबसूरत ग़ज़ल देने के लिए 

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