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मौन के शव  ?

बोलते चुपचाप

बात करते आप

रौंदते है मूक अन्तस को

बधिर होता है हाहाकार

दग्ध पर नहीं होते वो

ध्वंस लेता है फिर आकार

यही होता है प्रकृति में 

भावनाओ की विकृति में

सतत क्रम सा बार बार

सभी है सहते उसे

और हाँ कहते उसे

निष्ठुर प्रेम ! 

 

 

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2013 at 1:47pm

आदरणीय निकोर जी

 आपको अग्रज कहना मुझे अच्छा लगेगा

आपका हिंदी व् इंग्लिश दोनों पर समान अधिकार है

ऐसा सौभाग्य विरलों को मिलता है i

आपका आशिर्वाद पाकर मै भावुक हो गया i

आपका शत शत आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2013 at 1:42pm

पटेल जी

आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार i

Comment by vijay nikore on December 1, 2013 at 12:31pm

हृदय के हाहाकार को सुन्दर अभिव्यक्ति मिली है।

इस भावपूर्ण रचना हेतु हार्दिक बधाई।

सादर,

विजय निकोर

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 1, 2013 at 12:03pm

बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति ...............जय हो

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2013 at 11:37am

मित्र  गिरिराज जी

आपके प्रोत्साहन का आभारी हूँ  i आप कुशल तैराक है i मोती चुन ही लेंगे i

सादर i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 30, 2013 at 3:15pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , बड़ा गंभीर विषय चुना है आपने इस बार , बाहर ही बाहर तैर रहा हूँ , अंदर जाने के प्रयास मे हूँ !!!! 

गूढ़ार्थ लिये आपकी रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 30, 2013 at 2:35pm

म्रदु जी

अंतस को बधिर से मत जोडिये  i

बधिर होता हाहाकार  पृथक भाव्  है

आपने कभी ह्रदय का हाहाकार सुना है

हमारी बुद्धि हमें एक बार सचेत तो करती है

पर चंचल  मन उसे नहीं सुनता  i

शायद इतना संकेत काफी  होगा i

आपका शुष्क रचना में रूचि लेना का आभार i

Comment by राजेश 'मृदु' on November 30, 2013 at 2:09pm

रौंदते है मूक अन्तस को

बधिर होता है हाहाकार

पूरी रचना अत्‍यंत सुंदर लगी पर यहां अटक गया, अन्‍तस-बधिर  का समायोजन बड़ा छल कर रहा है, मार्गदर्शन की अपेक्षा है, सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 30, 2013 at 2:05pm

मीना पाठक जी

आपका हार्दिक आभार  i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 30, 2013 at 2:05pm

आदरणीय सरना  जी

आपके  प्रोत्साहन का हार्दिक आभार  i

सादर i

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