For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सूरज सफ़र में है तेरी यादों के साथ साथ

बेघर हुए हैं ख़्वाब धमाकों के साथ साथ।

वहशत भी ज़िंदा रहती है साँसों के साथ साथ॥

 

जब रौशनी से दूर हूँ कैसी शिकायतें,

अब उम्र कट रही है अँधेरों के साथ साथ॥

 

दरिया को कैसे पार करेगा वो एक शख़्स,

जिसने सफ़र किया है किनारों के साथ साथ॥

 

वीरान शहर हो गया जब से गया है तू,

हालांकि रह रहा हूँ हजारों के साथ साथ॥

 

पत्ता शजर से टूट के दरिया पे जो गिरा,

आवारा वो भी हो गया मौजों के साथ साथ॥

 

मुद्दत हुई की नींद चुरा ले गया कोई,

कटती है अब तो रात सितारों के साथ साथ॥

 

इस जीस्त के सफ़र में भी तन्हा नहीं रहा,

“सूरज” सफ़र में है तेरी यादों के साथ साथ॥

 

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 759

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 27, 2013 at 4:54pm

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आ० डॉ० सूर्या बाली जी 

हर शेर रोक रहा है.....

ये शेर तो ख़ास पसंद आया ..

दरिया को कैसे पार करेगा वो एक शख़्स,

जिसने सफ़र किया है किनारों के साथ साथ॥

हार्दिक शुभकामनाएं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 27, 2013 at 3:53pm

एक और मिसाल गढ़ती हुई ग़ज़ल सामने है, डॉक्टर साहब. बहुत खूब !

इन दो अश’आर के लिए बार-बार वाह वाह -

दरिया को कैसे पार करेगा वो एक शख़्स,
जिसने सफ़र किया है किनारों के साथ साथ॥

पत्ता शजर से टूट के दरिया पे जो गिरा,
आवारा वो भी हो गया मौजों के साथ साथ॥

दिल खुश होगया, भाई साहब.

एक अनुरोध -

आप ग़ज़ल के साथ उसके मिसरों के वज़्न भी दे दिया करें जो कि ओबीओ पर की परिपाटी है. सीखने वालों को सहुलियत होती है.

जैसे आपकी इस ग़ज़ल के मिसरों का वज़्न २२१ २१२१ १२२१ २१२ है.

सादर

Comment by विजय मिश्र on November 26, 2013 at 5:26pm
"दरिया को कैसे पार करेगा वो एक शख़्स,
जिसने सफ़र किया है किनारों के साथ साथ॥"
और ये
"पत्ता शजर से टूट के दरिया पे जो गिरा,
आवारा वो भी हो गया मौजों के साथ साथ॥" --- हर्टटचिंग लाइन्स ,मन को मना गयीं |बधाई प्राप्त करें सुंदर प्रस्तुति हेतु |
Comment by Meena Pathak on November 26, 2013 at 2:27pm

बहुत सुन्दर गज़ल, बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 26, 2013 at 2:20pm

दरिया को कैसे पर करेगा वो एक शख़्स,

जिसने सफ़र किया है किनारों के साथ साथ..गहन चिंतन से लबरेज अनुभव की बात ..एक सन्देश के रूप में 

पत्ता शजर से टूट के दरिया पे जो गिरा,
आवारा वो भी हो गया मौजों के साथ साथ....बहुत ही बढ़िया ..............मेरी तरफ से आपको हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 25, 2013 at 10:19am
आदरणीय डा. बाली भाई , लाजवाब गज़ल कही है , हर शे र उम्दा हैं !!!
वीरान शहर हो गया जब से गया है तू,
हालांकि रह रहा हूँ हजारों के साथ साथ॥

पत्ता शजर से टूट के दरिया पे जो गिरा,
आवारा वो भी हो गया मौजों के साथ साथ॥ -- आदरणीय ढेरों बधाई कुबूल करें !!!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 25, 2013 at 7:34am

//पत्ता शजर से टूट के दरिया पे जो गिरा,

आवारा वो भी हो गया मौजों के साथ साथ//

वाह बेहतरीन शेर है आदरणीय डॉ बाली साहब दाद कुबूल करें

Comment by नादिर ख़ान on November 24, 2013 at 11:13pm

इस जीस्त के सफ़र में भी तन्हा नहीं रहा,

“सूरज” सफ़र में है तेरी यादों के साथ साथ॥

आदरणीय सूर्या बाली जी, हमेशा  की तरह फिर एक बार लाजवाब प्रस्तुति ...

आपकी गजलें  ओ बी ओ में सूरज की तरह चमकती है । बहुत बधाई आपको ।

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on November 24, 2013 at 7:34pm

आ. सूर्य बाली भाई खूबसूरत गज़ल हुई है , हार्दिक बधाई ॥

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on November 24, 2013 at 7:19pm

आदरणीय खूबसूरत शेर के लिये बधाइयाँ
दरिया को कैसे पर करेगा वो एक शख़्सए
जिसने सफ़र किया है किनारों के साथ साथ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service