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ग़ज़ल - अक्षरों में खुदा दिखाई दे !

ग़ज़ल –

२१२२ १२१२ २२

अक्षरों में खुदा दिखाई दे

अब मुझे ऐसी रोशनाई दे |

 

हाथ खोलूं तो बस दुआ मांगूँ,

सिर्फ इतनी मुझे कमाई दे |

 

रोशनी हर चिराग में भर दूं ,

कोई ऐसी दियासलाई दे |

 

माँ के हाथों का स्वाद हो जिसमें,

ले ले सबकुछ वही मिठाई दे |

 

धूप तो शहर वाली दे दी है,

गाँव वाली बरफ मलाई दे |

 

बेटियों को दे खूब आज़ादी ,

साथ थोड़ी उन्हें हयाई दे |

 

तल्ख़ लहजा तमाम लोगों को,

मीर दे मीर की रुबाई दे |

 

दर्द होरी सा दे रहा है तो,

साथ धनिया सी एक लुगाई दे |

 

घूस के सौ दहेज़ से बेहतर,

अपने हाथों बनी चटाई दे |

       *सर्वथा मौलिक - अप्रकाशित .

       (c)&(p)  - अभिनव अरुण .

      

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Comment by Abhinav Arun on November 20, 2013 at 8:46pm

ग़ज़ल के अनुमोदन के लिए आपका आभारी हूँ आ. महिमा जी ! बहुत धन्यवाद आपका !!

Comment by MAHIMA SHREE on November 18, 2013 at 8:44pm

हर शेर मन पे  अपनी छाप छोडती हुयी .. बेहद सुंदर ... बहुत -२ बधाई आपको आदरणीय अभिनव जी .....

Comment by Abhinav Arun on November 18, 2013 at 8:13pm
आ. डॉ साहिबा , बहुत आभार प्रोत्साहन के लिए !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 18, 2013 at 7:59pm

हाथ खोलूं तो बस दुआ मांगूँ,

सिर्फ इतनी मुझे कमाई दे |..........बहुत खूब 

सीधी सादी बातें....सुन्दरता से अभिव्यक्त की गयी हैं 

हार्दिक बधाई इस शानदार ग़ज़ल पर.

Comment by Abhinav Arun on November 17, 2013 at 8:30pm

आ. अरुण जी आपने हौसला बढ़ाया है , शुक्रिया तहे दिल से !!

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 17, 2013 at 12:59pm

आदरणीय अरुण अभिनव भाई जी एक एक शेर पर ढेरों दाद कुबल फरमाएं बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल कही है आपने बेहद उम्दा शानदार

Comment by Abhinav Arun on November 17, 2013 at 11:41am

सादर प्रणाम , आदरणीय अग्रज श्री , आपके इस स्नेह और आशीर्वाद को संगृहीत कर लिया है ...मेरे लिए यह स्नेह वर्षा उत्कृष्टता का कारक बनेगी ..प्रभु करे !!

Comment by Abhinav Arun on November 17, 2013 at 11:39am

हार्दिक आभार आ. श्री राम शिरोमणि जी और श्री सलीम जी आपकी प्रातक्रिया उत्साह बढाने वाली है , आप दोनों का दिल से धन्यवाद !

 

Comment by Abhinav Arun on November 17, 2013 at 11:38am

आ. श्री वीनस जी ,ग़ज़ल आप सदृश विद्वत जन की प्रशंसा पाकर उत्फुल्लित है , बेहतर का प्रयास होगा , शुक्रिया !

Comment by वीनस केसरी on November 17, 2013 at 3:27am

माँ के हाथों का स्वाद हो जिसमें,

ले ले सबकुछ वही मिठाई दे |

 

धूप तो शहर वाली दे दी है,

गाँव वाली बरफ मलाई दे |

वाह वा कैसी सादा सी बात है और कितना लुत्फ़ दे रही है ....
मज़ा आ गया

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