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अंतर मन क्रंदन से

***************

व्यर्थ लादे बंधन से

अंतर मन क्रंदन से

       टूटा जो मन भरोष

       जीवंत हुआ जो रोष

              तो भी क्या कुछ होगा ?

 

आशा के मर्दन से

वादों के भंजन से

        अलसाया होश जोश

        जानेंगे किसका दोष   

              तो भी क्या कुछ होगा ?

 

दोषों के मंडन से

साक्ष्यों के खंडन से  

         उपजेगा स्व,जय घोष

         कम पड़े जो शब्द कोश      

               तो भी क्या कुछ होगा   ?

 

अर्चन अभिनंदन से

शीतल हो चन्दन से         

       चल कर के कोस कोस

       कम होता फिर भी तोष

               तो भी क्या कुछ होगा ?

                  

भक्त -प्रेम बंधन से

अवतारी साधन से 

     करने जब पाल- पोष        

     स्वयं आयें आशुतोष

 

           तब कुछ निश्चित होगा   !!     

  

              ********

            गिरिराज भंडारी  

         मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 26, 2013 at 5:20pm

आदरणीय सौरभ भाई , गीत आपको पसन्द आया , मेहनत सफल हुई , उत्साह वर्धन के लिये हार्दिक आभार !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 26, 2013 at 3:05pm

वाह !

बाह्यकरण की लाचार पहुँच पर सुन्दर भावाभिव्यक्ति हुई है, आदरणीय गिरिराज जी.

हार्दिक शुभकामनाएँ

Comment by रविकर on August 19, 2013 at 10:57am

सफल प्रयास-
खूबसूरत रचना-
आभार आदरणीय-

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 19, 2013 at 8:34am

सुंदर प्रस्तुति ..सादर बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 18, 2013 at 11:14am

बहुत बहुत शुक्रिया , सुरेन्द्र भाई !!

Comment by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा on August 18, 2013 at 11:02am

बहुत सुन्दर. प्रशंसा में 

कम पड़े जो शब्द कोश ... तो भी क्या! गंभीर भावों का सुन्दर संयोजन. बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 17, 2013 at 1:45pm

बहुत बहुत आभार , आदरणीया आन्नपूर्णा जी !!

Comment by annapurna bajpai on August 17, 2013 at 1:06pm

आदरणीय गिरिराज भण्डारी जी बहुत ही  सुंदरता से भावभिव्यक्ति हुई है अनुपम रचना , बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 17, 2013 at 12:16pm

सुमित भाई , बहुत बहुत धन्यवाद आपको , आभार आपका !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 17, 2013 at 12:11pm

श्याम भाई , हार्दिक आभार आपका !!

कृपया ध्यान दे...

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