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फूल चम्पा के सब खो गए
जब से हम शह्र के हो गए

रात फिर बेसुरी धुन बजाती रही
दोपहर भोर पर मुस्कुराती रही
रतजगों की फसल
काटने के लिए
बीज बेचैनी के बो गए

प्रश्न पत्रों सी लगने लगी जिंदगी
ताका झाकी का मोहताज़ है आदमी
आयेगा एक दिन
जब सुनेंगे यही
लीक पर्चे सभी हो गए

मौल श्री से हैं झरते नहीं फूल अब 

गुलमोहर के तले है न स्कूल अब
अब न अठखेलियाँ
चम्पई उंगलियाँ
स्वप्न आये न फिर जो गए

(मौलिक अवं अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on August 7, 2013 at 10:55am

आदरणीय राणा प्रताप जी:

 

//रात फिर बेसुरी धुन बजाती रही
दोपहर भोर पर मुस्कुराती रही
रतजगों की फसल
काटने के लिए
बीज बेचैनी के बो गए//

 

इतना सुमधुर और भावुक गीत मंच पर साझा करने के लिए धन्यवाद!

 

सादर,

विजय निकोर

 

 

Comment by Vasundhara pandey on August 5, 2013 at 7:36pm

मौल श्री से हैं झरते नहीं फूल अब 

गुलमोहर के तले है न स्कूल अब...,,फूलों सी बरसती..मन में इक टीस उभारती सुन्दर रचना राणा जी..

Comment by Arun Sri on August 5, 2013 at 12:09pm

वाह !
गुलमोहर के तले है न स्कूल अब ......... कुछ धंस गया मन में ! कमाल का गीत ! शब्दों से परे बहुत कुछ है जो महसूस करने पर बेसुध हो जाना विवसता है ! लगता है जैसे चंद पंक्तियों में वर्षों का अनुभव और मर्म समा गया है ! नत हूँ !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:37am

आदरणीय अभिनव जी ..आपने रचना सराही मेरा लेखन सफल हुआ| हार्दिक धन्यवाद|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:35am

गीतिका जी गीत पसंद करने के लिए शुक्रिया|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:34am

आदरणीय जितेन्द्र 'गीत'  जी आपके तो नाम में ही गीत है, गीत आपने पसंद किया ...मेरा प्रयास सफल रहा, बहुत बहुत धन्यवाद|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:30am

आदरणीय बृजेश नीरज जी गीत पसंद करनें के लिए शुक्रिया|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:28am

विवेक भाई ..गीत में प्रयुक्त बिम्बों को सरहाने के लिए तहे दिल से आभार|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:27am

आदरणीय  Laxman Prasad Ladiwala जी रचना पर आपकी सार्थक टिपण्णी के लिए आभार|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 5, 2013 at 11:19am

आदरणीय सौरभ सर ...गीत की आत्मा तक जाकर ..उत्साह वर्धन करने हेतु हार्दिक धन्यवाद|

कृपया ध्यान दे...

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