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तनाव की लिखावटें...
अक्सर अजीब होती हैं ...
काँपती सी और कुछ उलझी हुई..
उनमें कहीं कहीं शब्द छुट जाते हैं ..
कटिंग होती है..
और सहायक क्रिया नहीं होती है
सबसे अजीब होता है ..
सपनों का मरना ..
एक दोस्त पाठ को बदल कर कहता है ..
खतरनाक है सपनों का बिखर जाना ..
दूसरा दोस्त पाठ को फिर बदलता है ..
कहता है उससे अधिक खतरनाक है ..
सपनों का बिक जाना ..
वह सब कुछ बेच सकता है ..
अपनी जमीर, अपना जहाँ..
यहाँ तक कि अपना स्वप्न ..
दिमाग रह रह कर सोचता है ..
माथे पर सिलवटें बढती जाती है ..
शायद तनाव भारी पड़ता है ..
जिंदगी यूँ ही गुजरती है ..
तनाव में ..
रह जाता है सिर्फ तनाव, तनाव, तनाव ...

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 485

Comment

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Comment by Amod Kumar Srivastava on June 30, 2013 at 7:59am

आदरणीय रविकर जी एवं माथुर जी... बहुत बहुत आभार .... 

Comment by D P Mathur on June 27, 2013 at 8:37pm

रह जाता है सिर्फ तनाव तनाव तनाव , सही में आज यदि कोई पॉवरफुल है तो वो तनाव ही है अच्छी रचना के लिए आपको बधाई !

Comment by रविकर on June 27, 2013 at 10:31am

अपनी बात रखने में सफल रचना-

शुभकामनायें आदरणीय-

Comment by Amod Kumar Srivastava on June 27, 2013 at 10:21am

Contee Mukerji jee, Gitika jee, Jitendra Pastariya jee आप सभी ने मेरे  सृजनात्मक तनाव को समझा और महसूस करा इसके लिए धन्यवाद् ... आभार ..

Comment by coontee mukerji on June 27, 2013 at 2:00am

मन के अंतर्द्व्न्द की सुंदर अभिव्यक्ति.

सादर.

Comment by वेदिका on June 26, 2013 at 9:49pm

मेडिटेशन है न :))))) 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 26, 2013 at 8:07pm
आदरणीय..अमोद जी, बड़ी ही तनाव भरी पंक्तियां.."आदरणीय..शुभकामनाऐं"

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