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अब तो कर दो बंद, लोगो प्रकृति का दोहन

दोहन करते प्रकृति का, बड़े बड़े विद्वान्

चला चला बस योजना, बनते खूब महान

बनते खूब महान , हरे जंगल कटवाते

दूषित कर परिवेश, कारखाने बनवाते

धरा बचाने आज, नहीं आने मनमोहन

अब तो कर दो बंद, लोगो प्रकृति का दोहन

 

संदीप पटेल “दीप”  

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Comment by बृजेश नीरज on June 6, 2013 at 10:59pm

संदीप भाई बहुत सुन्दर! आपको ढेरों बधाई!

Comment by coontee mukerji on June 6, 2013 at 9:47pm

यह कड़वी सच्चाई हर किसी से छिपा नहीं......विडम्बना देखिये धरती का दोहन करते करते अब इंसान की नज़र उसके भाई पर

(मंगल ग्रह ) पड़ गयी है......देखें  अब क्या होता है.

सादर

 कुंती

Comment by Shyam Narain Verma on June 6, 2013 at 5:37pm
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए ……………..
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 6, 2013 at 4:27pm

सुन्दर कुंडलिया छंद के माध्यम से अन्धाधुल्न्ध दोहन के प्रति चेतावनी देती रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री संदीप कुमार पटेल जी 

Comment by विजय मिश्र on June 6, 2013 at 10:21am
बंद न भी करें किन्तु व्यवस्थित अवश्य करें अन्यथा इस दोहन की प्रतिक्रिया बहुत ही वीभत्स होगी ,झेलना दुसाध्य होने वाला है . जीवन सन्देश है आपकी रचना .शुभेच्छाएँ .
Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on June 6, 2013 at 9:56am

सुन्दर कुण्डलिया के लिए बधाई किन्तु......प्रकृति का लोगो दोहन.....ऐसा कीजिये तो प्रवाह अधिक आयेगा....ऐसा मुझे लगता है 

Comment by annapurna bajpai on June 6, 2013 at 9:21am

आदरणीय संदीप जी बहुत सुन्दर कुण्डलिया की रचना की है टिप्पणी के तौर पर रविकर जी की रचना भी सराहनीय है.

Comment by रविकर on June 6, 2013 at 8:53am

बहुत बढ़िया आदरणीय संदीप जी-
शुभकामनायें-

दोहन हनन समान तब, जब मनमोहन मौन |
हनवाना हरदिन करे, रोक सकेगा कौन |
रोक सकेगा कौन, स्वयं कुदरत कुछ कर दे |
करे स्वयं संतुलित, स्वयं कुछ ऐसा वर दे |
सत्ता पाए शक्ति, सुधारे खुद के गोहन |
रोके बन्दर बाँट, तभी रुक पाए दोहन ||


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 6, 2013 at 8:16am

मनमोहने का श्लेष मज़ा दे गया..

इस संदेशपरक कुण्डलिया के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय संदीप जी.

Comment by ram shiromani pathak on June 6, 2013 at 12:02am

आदरणीय संदीप जी बहुत ही सुन्दर कुण्डलिया रची है भाई अपने ///बधाई!

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