For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्या जीवन है/हाइकू (प्रयास)

बालू का स्थल
जालाभास रश्मि से
तपती प्यास
------------------

प्रीति सुमन
नागफनी का बाग
व्यर्थ खोजना
------------------

तृप्ति कामना
घी दहकाए ज्वाला
पूर्ति आहुति
-------------------

जीवन यात्रा
हर क्षण रहस्य
रोना या गाना
-------------------
गन्तव्य कहाँ!
लमकन जारी है
क्या जीवन है?
-विन्दु (मौलिक,अप्रकाशित)

Views: 674

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Vindu Babu on April 28, 2013 at 4:01pm
आपने प्रत्येक रचना का अनुमोदन किया,यह देखकर बहुत अच्छा लगा।
सादर आभार आदरणीय
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 2:32pm

प्रीति सुमन
नागफनी का बाग
व्यर्थ खोजना

अति सुन्दर 

बधाई,

आदरणीया वंदना जी , सादर 

Comment by Vindu Babu on April 14, 2013 at 9:50am
परम् आदरणीय सौरभ पाण्डेय महोदय आपने अवलोकन किया मेरा प्रयास सार्थक हुआ।
आपका बहुत आभार!
सादर
Comment by Vindu Babu on April 14, 2013 at 9:48am
आदरेया सावित्री राठौर आपकी प्रतिक्रिया हमारा सम्बल है।
सादर आभार आपका!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 14, 2013 at 7:48am

आदरणीया वन्दनाजी, आपकी हाइकु-रचनाएँ प्रभावी हैं.सादर बधाइयाँ.

Comment by Savitri Rathore on April 7, 2013 at 3:05pm

प्रीति सुमन
नागफनी का बाग
व्यर्थ खोजना
------------------
अतिसुन्दर विन्दु जी !

Comment by Vindu Babu on April 6, 2013 at 10:18am
आदरणीय रक्ताले महोदय सादर अभिनन्दन!
आपने मेरे प्रयास का अवलोकन किया इसके लिए सादर आभार.
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 5, 2013 at 8:45pm

आदरणीया सादर, बहुत सुन्दर हाइकु, बधाई स्वीकारें.

Comment by Vindu Babu on April 5, 2013 at 8:29pm
आदरेया आपकी प्रतिक्रिया मेरा सौभाग्य है।
पहले प्रयास मे आपके अमूल्य सुझाव पर पर सुधार लाने का प्रयास किया,अब आपके इस सुझाव का भी विशेष ध्यान रखने की कोशिश रहेगी।
महोदया पुन: कहुंगी कि यहां उपस्थित होने का मेरा पहला उद्देश्य सीखना ही है। आपके सस्नेह सहयोग के लिए सादर आभार!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 5, 2013 at 7:24pm

बहुत सुन्दर हायकू लिखे हैं आ० वंदना जी.

कथ्य सांद्रता हायकू का विशिष्ट गुण है...जिससे भरपूर हैं यह हायकू , हार्दिक बधाई स्वीकार करें 

हायकू के शिल्प के बारे में एक बात सांझा करना चाहूंगी, "यदि पहली और तीसरी पंक्ति समतुकांत हो तो हायकू कई गुना निखर उठते हैं."

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
7 hours ago
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
9 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
13 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
13 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
13 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
14 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
May 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service