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'अंश हूं तुम्हारा'

जब जिन्दगी की किनारों की
हरियाली सूख गई हो,
पक्षी मौन होकर
आपने नीड़ों मे जा छुपे हों,
सूरज पर ग्रहण की कालिमा
गहराती ही जा रही हो,
मित्र,स्वजन कंटीली राह में
अकेले छोड़कर चल दिये हों,
संसार की सारी नाखुशी
मेरे ललाट को ढक रही हो,
तब मेरे प्रभु!
मेरे होठों पर हंसी की
उजली किरण बनाए रखना।
मैं अंश हूं तुम्हारा
कायरता को न सौंप देना।।
-विन्दु

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Comment

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Comment by Vindu Babu on April 28, 2013 at 4:05pm
आदरणीय कुशवाहा महोदय आपकी खोजी प्रवृत्ति को प्रणाम है।
स्नेह पाकर मन अभिभूत हुआ।
सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 2:34pm

तब मेरे प्रभु!
मेरे होठों पर हंसी की
उजली किरण बनाए रखना।
मैं अंश हूं तुम्हारा
कायरता को न सौंप देना।।

सुन्दर प्रार्थना 

बधाई 

आदरणीया वन्दना जी 

सादर 

Comment by राजेश 'मृदु' on March 25, 2013 at 12:41pm

प्रभु सबकी प्रार्थना स्‍वीकार करते हैं

Comment by Vindu Babu on March 24, 2013 at 6:02pm
आदरणीय निकोर सर,आदरणीय केवल प्रसाद जी,आदरणीय रामशिरोमणि जी एवं आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी सादर अभिनन्दन।
आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया और शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार।
सादर
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 24, 2013 at 4:41pm

अभिव्यक्त सुन्दर भावनाए, मेरी हार्दिक शुभ कामनाए 

Comment by ram shiromani pathak on March 24, 2013 at 1:36pm

आदरणीया,  वंदना तिवारी जी,बहुत ही अच्छी प्रार्थना है/////////////////बहुत बहुत साधूवाद!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 24, 2013 at 11:55am

आदरणीया,  वंदना तिवारी जी,  सादर नमन !  आपकी प्रार्थना दिल से है,  सर्वकल्याणकारी है।  बहुत बहुत साधूवाद!

Comment by vijay nikore on March 24, 2013 at 10:42am

आदरणीया वंदना जी:

 

मित्र,स्वजन कंटीली राह में
अकेले छोड़कर चल दिये हों ....
....तब मेरे प्रभु!
मेरे होठों पर हंसी की
उजली किरण बनाए रखना।

 

बहुत ही अच्छी प्रार्थना है,

जो समय पर सहारा बन सकती है।

 

सादर,

विजय निकोर

 

 

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